लखनऊ: बाइक मॉडिफिकेशन के नाम पर उड़ रही नियमों की धज्जियां, चोरों को मिल रहा बढ़ावा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की पुलिस बाइक चोरी के मामलों को कम करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है, पर फिर भी आए दिन सार्वजनिक जगहों से बाइक चोरी के मामले प्रकाश में आते हैं। दरअसल बाइक के मॉडिफिकेशन का फैशन बाइक चोरों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। बाइक मॉडिफिकेशन के नाम …
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की पुलिस बाइक चोरी के मामलों को कम करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है, पर फिर भी आए दिन सार्वजनिक जगहों से बाइक चोरी के मामले प्रकाश में आते हैं। दरअसल बाइक के मॉडिफिकेशन का फैशन बाइक चोरों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। बाइक मॉडिफिकेशन के नाम पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
चोरी की मोटर साइकिलों को मॉडिफिकेशन करवा लेते हैं चोर
चोरी की गई बाइकों को मॉडिफिकेशन कराकर सेकेंड हैंड बेचने का गोरखधंधा तेजी से फलफूल रहा है। हैरानी की बात ये है कि बाइक मॉडिफिकेशन को लेकर लखनऊ पुलिस के स्तर से कोई गाइडलाइन तय नहीं की गई है। मॉडिफिकेशन से पूर्व व्हीकल ओनर से किसी तरह के कागजात आदि की मांग नहीं की जाती है। पुलिस के पास तो यह जानकारी तक नहीं कि शहर में कितने बाइक मॉडिफिकेशन सेंटर्स संचालित हैं। इसी का फायदा उठाकर चोरी की गई बाइकों को मॉडीफाई कराकर उनका स्वरूप पूरी तरह से बदल दिया जाता है और सेकेंड हैंड बेच दिया जाता है।
चेचिस से छेड़छाड़ मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन
विदित हो कि मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 52 के तहत वाहन की चेचिस से निर्धारित छूट से अधिक छेड़छाड़ दंडनीय अपराध है। जिसमें 10 हजार रूपये से लेकर 10 करोड़ रूपये तक की सजा का प्रावधान है। पर इसे लेकर बाइक शहर में संचालित बाइक मॉडिफिकेशन सेंटर्स की एक बार भी जांच नहीं की गई है।
मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। अगर बाइक मॉडिफिकेशन सेंटर्स में मानकों की अनदेखी की जा रही है तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी…श्रवण कुमार, अपर पुलिस उपायुक्त, यातायात।
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