भारत-पाकिस्तान ने एक-दूसरे को परमाणु प्रतिष्ठानों की सौंपी लिस्ट, जानें क्या है वजह

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नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान ने 31 साल के दस्तूर को जारी रखते हुए, शनिवार को एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया, जो दोनों पक्षों को एक-दूसरे के परमाणु केंद्रों पर हमला करने से रोकता है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि दोनों देशों ने भारत और पाकिस्तान …

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान ने 31 साल के दस्तूर को जारी रखते हुए, शनिवार को एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया, जो दोनों पक्षों को एक-दूसरे के परमाणु केंद्रों पर हमला करने से रोकता है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि दोनों देशों ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला न करने को लेकर हुए समझौते के तहत शामिल परमाणु प्रतिष्ठानों और केंद्रों की सूची का आदान-प्रदान किया।

यह नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यम के जरिये एक साथ किया गया। साल 1991 में लागू हुआ समझौता दोनों देशों को हर साल पहली जनवरी को समझौते के तहत शामिल परमाणु प्रतिष्ठानों और केंद्रों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान करता है।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत और पाकिस्तान ने आज नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक माध्यमों के जरिए, परमाणु प्रतिष्ठानों और केंद्रों की सूची का आदान-प्रदान किया, जो भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों और केंद्रों के खिलाफ हमले के निषेध पर समझौते के तहत शामिल है।

सूची का आदान-प्रदान कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद पर दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव के बीच हुआ। मंत्रालय ने कहा कि 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षरित और 27 जनवरी, 1991 को लागू हुआ समझौता, अन्य बातों के साथ, यह प्रावधान करता है।

भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे को हर साल एक जनवरी को उन परमाणु प्रतिष्ठानों और केंद्रों के बारे में सूचित करेंगे। जिन्हें समझौते के तहत शामिल किया गया है। उसने कहा कि यह दोनों देशों के बीच इस तरह की सूचियों का लगातार 31वां आदान-प्रदान है। पहला एक जनवरी 1992 को हुआ था।

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