मिशन 2022: अखिलेश यादव ने पकड़ी केजरीवाल की राह

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय मंत्री अमित शाह को आगामी विधानसभा चुनाव में मात देने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनावी एजेंडे को धार देने में लग गए हैं। उन्होंने आप प्रमुख केजरीवाल की तर्ज पर प्रदेश में घोषणा करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे चुनाव …

लखनऊ। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय मंत्री अमित शाह को आगामी विधानसभा चुनाव में मात देने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनावी एजेंडे को धार देने में लग गए हैं। उन्होंने आप प्रमुख केजरीवाल की तर्ज पर प्रदेश में घोषणा करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे चुनाव पास आएंगे वैसे-वैसे सपा अध्यक्ष की घोषणाएं भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख केजरीवाल ने दिल्लीवासियों की सुविधाएं देने के लिए एक से बढ़कर घोषणा की।

इन घोषणाओं के बूते ही उन्होंने दोबारा सरकार बनाने में सफलता हासिल की। इससे प्रभावित होकर उन्हीं की पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सबसे पहले 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। उसके बाद प्रदेश के अन्य राजनैतिक दलों ने भी चुनावी माहौल के चलते उस घोषणा को अपनी एजेंडे में शामिल कर लिया लेकिन औपचारिक तौर पर किसी ने खुले मंच से इसका ऐलान नहीं किया था।

अखिलेश यादव ने अपनी घोषणा पत्र का पहला पन्ना खोल दिया है और कार्यकर्ताओं को नववर्ष में संबोधित करते हुए इसकी घोषणा कर दी है। उन्होंने अपनी घोषणा करने में प्रदेशवासियों के लिए 300 यूनिट फ्री बिजली के साथ किसान कार्ड भी खेल दिया है। किसानों के लिए सिंचाई पूरी तरह निशुल्क कर दी है। साथ ही एक और बात उन्होंने कही कि आने वाले समय में चुनाव पास आते हुए कई घोषणा करेंगे जो चुनावी एजेंडा का हिस्सा होंगी। इस बात से निश्चित रूप से विपक्षी दलों की धड़कनें तेज होंगी।

महंगाई व बेरोजगारी मुद्दें पर सपा चुनावी एजेंडे को दे रही धार

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा लगातार विपक्षियों पर आक्रामक होती जा रही है। मुख्य रूप से भाजपा के छह चुनावी रथ और लगातार रैलियों को देखते हुए अखिलेश ने अपने रथ की रफ्तार को बढ़ा दिया है। उन्होंने अपने नौ चरण की यात्रा पूरी कर ली है और दसवें चरण की यात्रा रविवार दो जनवरी को शुरू करने जा रहे है।

उन्होंने अपने चुनावी एजेंडे में महंगाई और बेरोजगारी को प्रमुख रूप से जोड़ रखा है और लगातार इससे जनता के दर्द पर मरहम रखने का प्रयास कर रहे है। वे लगातार रैली में उन मुद्दों को जनता के बीच ले जा रहे है और संवाद कर रहे है ताकि लोगों के बीच उनकी पार्टी स्वीकार्यता बढ़ती जाए।

यह भी पढ़ें:-कोरोना की तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों को जारी की ये गाइडलाइन

संबंधित समाचार