लखनऊ: शहीद विवेक सक्सेना की मां लौटाना चाहती हैं बेटे को मिला शौर्य चक्र, जानें वजह
लखनऊ। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकीं निशा होगा..। अमर शहीद शौर्य चक्र विजेता विवेक सक्सेना की मां के आंसू भले कुछ देर के लिए ही सही पर हमारे आपके दिलों में सहानुभूति का भाव जगा दें लेकिन संवेदनाशून्य अधिकारियों की कार्यशैली में कोई बदलाव आएगा, …
लखनऊ। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकीं निशा होगा..। अमर शहीद शौर्य चक्र विजेता विवेक सक्सेना की मां के आंसू भले कुछ देर के लिए ही सही पर हमारे आपके दिलों में सहानुभूति का भाव जगा दें लेकिन संवेदनाशून्य अधिकारियों की कार्यशैली में कोई बदलाव आएगा, ऐसी उम्मीद करना भी बेमानी है। शायद इसी वजह से शहीद की बुजुर्ग मां बेटे को सरकार द्वारा दिया गया शौर्य चक्र वापस करना चाहती है।
बता दें कि सरोजनी नगर के मीरानपुर पिनवा दरोगा खेड़ा निवासी विवेक सक्सेना 18 वर्ष पर देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। उनके शौर्य को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उस समय शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। लेकिन अब उनका परिवार यह मेडल सरकार को वापस करना चाहता है। इसके लिए शहीद विवेक की मां ने बीएसएफ के स्थानीय अधिकारियों को पत्र भी सौंप दिया है।
शहीद विवेक सक्सेना की बुजुर्ग मां सावित्री देवी ने बताया कि 18 वर्ष पूर्व विवेक की शहादत के बाद राज्य सरकार ने आर्थिक मदद की घोषणा का ऐलान किया था लेकिन अभी तक उसे राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिली। इस मदद के लिए वह राज्य सरकार के अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटकर पिछले 40 दिनों से सरोजनी नगर में बेटे की स्मृति में बनाए गए स्मारक पर धरने पर बैठीं हुईं हैं। इसके बावजूद किसी अधिकारी ने उनकी मदद तो छोडिए बात करना भी मुनासिब नहीं समझा।
चार सरकारें बदली फिर भी नहीं मिली मदद
सावित्री सक्सेना का कहना है कि अधिकारी कहते हैं कि आप यहाँ कि निवासी नहीं हैं, इसलिए सरकारी मदद नहीं दे सकते। जबकि हम 1967 से लखनऊ में रह रहे हैं। हमारे बच्चे भी यही हुए , यही पढ़े और उसके बाद सर्विस में गए। विवेक का अंतिम संस्कार भी यहीं हुआ। चार सरकारें बदल गयी पर कोई मदद नहीं मिली। भाई रणजीत सक्सेना के मुताबिक सरकारी अधिकारी यह मानाने को तैयार नहीं है कि लखनऊ के निवासी है। जिसकी वजह से तहसाल और विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
शहादत के समय लखनऊ के थे विवेक पर अब प्रमाण की दरकार
चार जनवरी 1999 को वे खुफिया विभाग इंटेलिजेंस ब्यूरो को ज्वाइन किये थे। दो फरवरी 2003 में मणिपुर में आतंकवादियों कि घुसपैठ में सेना ने ऑपरेशन ज्वाला चलाया था जिसके दौरान आठ फरवरी 2003 को विवेक शहीद हो गए। उनके पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट रहे, वहीं एक भाई राजीव इंडियन एयरफोर्स में है। जब विवेक का शव शहर आया था तो राजधानी उनको अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ी थी। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले राजाधानी के शहीद लाल पर उस समय लखनऊ ने गर्व से अपना अधिकार बताया लेकिन अब उनके परिवार को लखनऊ का नागिरक होने का प्रमाण पत्र भी नहीं मिल पा रहा। किसी शहीद के परिवार के लिए यह दंश कितना अपमानजनक होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
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