रामपुर : आजम खां के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश में भाजपा
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। प्रदेश के चुनाव में रामपुर इन दिनों खासा सुर्खियों में है। दरअसल इलाका सपा के कद्दावर नेता आजम खां का जो है। 102 मुकदमों में आजम भले ही सीतापुर में जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन, यहां पूरे जिले में उनका वर्चस्व कायम है। भारतीय जनता पार्टी इस बार आजम का …
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। प्रदेश के चुनाव में रामपुर इन दिनों खासा सुर्खियों में है। दरअसल इलाका सपा के कद्दावर नेता आजम खां का जो है। 102 मुकदमों में आजम भले ही सीतापुर में जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन, यहां पूरे जिले में उनका वर्चस्व कायम है। भारतीय जनता पार्टी इस बार आजम का वर्चस्व तोड़ना चाहती है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी डेढ़ माह के भीतर दूसरी बार जिले में जनसभा कर चुके हैं। इस बार भाजपा आजम के गढ़ में सेंधमारी कर पाएगी या आजम खां जेल में बंद रहने की सहानुभूति के चलते अपना वर्चस्व बनाए रख पाएंगे, ये चुनाव के बाद ही पता चलेगा।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के दबदबे वाली रामपुर विधानसभा सीट पर इस बार चुनाव बेहद अहम है। मुस्लिम बहुल इस सीट से खुद आजम खान 9 बार विधायक रह चुके हैं। फिलहाल पूर्व कैबिनेट मंत्री व सांसद आजम खां और उनके बेटे करीब 22 माह से जेल मे बंद हैं। वहीं भाजपा उनके गढ़ में सेंधमारी के प्रयास में जुटी है। ऐसे में रामपुर विधानसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद लगाई जा रही है। दरअसल-2019 के उपचुनाव में यहां भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी।
जैसा कि आम कहावत है कि उपचुनाव में सत्तारुढ़ पार्टी की ही जीत होती है, वह यहां कामयाब नहीं हुई। क्योंकि आजम खां ने सांसद बनने के बाद सीट छोड़ी थी, तो अपनी पत्नी डा. तजीन फात्मा को चुनाव लड़ाया था जोकि अच्छे वोटों से जीती थीं। इस बार रामपुर में मु्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
8 नवंबर 2021 को उन्होंने गांधी स्टेडियम में सभा की थी, इसके बाद 01 जनवरी को साल के पहले दिन भी मुख्यमंत्री रामपुर के रठौंडा में जनसभा करने आए थे। दोनों जगह तमाम योजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण भी किए। बता दें कि योगी सरकार ने आजम पर शिकंजा कसने के साथ ही बड़े पैमाने पर मुकदमे दर्ज कराए।
आजम के खिलाफ 102 मुकदमे दर्ज हुए और 26 फरवरी 2020 को उन्हें उनके परिवार के साथ जेल में डाल दिया गया। पत्नी को जमानत मिल गई है। आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला जेल में हैं।
नौ बार विधायक बने आजम खां
रामपुर सीट को आजम परिवार का मजबूत किला माना जाता है। 1980 में जनता दल (सेक्युलर) के टिकट से आजम इस सीट से पहली बार विधायक बने। इसके बाद वह अलग-अलग दल में रहते हुए लगातार चार बार विधायक चुने गए। 1996 के चुनाव में यहां कांग्रेस ने वापसी की तो फरवरी 2002 से 2017 तक एक बार फिर आजम ने जलवा कायम किया।
सहानुभूति बटोरने की कोशिश
सियासी पंडितों का कहना है कि जेल में बंद आजम सहानुभूति वोट बटोरने में भी कामयाब हो सकते हैं। पार्टी सूत्र कहते हैं कि आजम रामपुर सीट से खुद मैदान में उतर सकते हैं।
चुनाव में नवेद मियां भी बिगाड़ सकते हैं खेल
नवाब परिवार से अभी तक रामपुर से नवाब मुर्तजा अली 1973 में विधायक रहे हैं। इसके बाद वे स्वार से चुनाव लड़ने लगे। नवाब परिवार का कोई व्यक्ति यहां से चुनाव नहीं लड़ा है। इस बार कांग्रेस से पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां खुद उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस से उन्होंने अनुमति ले रखी है। ऐसे में रामपुर सीट का खेल बिगड़ सकता है। क्योंकि नवाब खानदान की रामपुर शहर में भी मजबूत पकड़ है।
रामपुर विधानसभा सीट एक नजर में
कुल मतदाता 3,18,714
पुरुष 1,72,560
महिला 1,46,141
वर्तमान विधायक तंजीम फातिमा (सपा)
