मुरादाबाद : 10 हजार खर्च कर जाहिद हुसैन बने विधायक
सलमान खान/अमृत विचार। 30 साल पहले चुनाव का महौल बिल्कुल अलग था। उस समय जनता प्रत्याशी का रसूख देखकर वोट देती थी। उस दौर में प्रत्याशियों को पैसा नहीं, अपनी मेहनत से जीत हासिल करनी होती थी। प्रत्याशी रात-दिन गली-मोहल्लों में पैदल जाकर जनता से जनसंपर्क किया करता थे। लेकिन, आज का दौर बहुत बदल …
सलमान खान/अमृत विचार। 30 साल पहले चुनाव का महौल बिल्कुल अलग था। उस समय जनता प्रत्याशी का रसूख देखकर वोट देती थी। उस दौर में प्रत्याशियों को पैसा नहीं, अपनी मेहनत से जीत हासिल करनी होती थी। प्रत्याशी रात-दिन गली-मोहल्लों में पैदल जाकर जनता से जनसंपर्क किया करता थे। लेकिन, आज का दौर बहुत बदल गया है। अगर हम बात करें मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट की तो इस सीट पर 1991 में जनता दल के प्रत्याशी हाजी जाहिद हुसैन विधायक बने थे।
अमृत विचार से बातचीत में पूर्व नगर विधायक जाहिद हुसैन ने बताया कि पहले के दौर में जनता प्रत्याशी की शख्सियत देखकर उसे विधायक चुनती थी। पहले प्रत्याशी को वोट पाने के लिये रुपये खर्च नहीं करने पड़ते थे। बल्कि खुद रात-दिन जनता से संपर्क साधना पड़ता था। उन्होंने बताया कि 1991 में वह जनता दल के टिकट पर 10 हजार रुपये खर्च करके ही विधायक बन गए थे। जबकि उन्हें पार्टी ने चुनाव लड़ने के लिए 20 हजार रुपये दिये थे। बाकी 10 हजार उन्होंने पार्टी फंड में वापस कर दिए थे। जाहिद हुसैन ने बताया कि उस समय उनको 48 हजार वोट मिले थे। जिसमें उन्होंने जनसंघ की प्रत्याशी शकुंतला सिक्का को 20 हजार वोटों से हराया था। जबकि तीसरे नंबर पर प्रेम शंकर शर्मा रहे थे।
छह हजार रुपये मिलता था वेतन, लोन की किश्त करते थे जमा : जाहिद हुसैन ने बताया कि जब वह विधायक बने थे तो उन्हें छह हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था। उस समय विधायक को निधि नहीं मिलती थी। छह हजार के मासिक वेतन में जाहिद हुसैन अपने लोन की किस्त की जमा करते थे और बाकी रकम नेक काम में लगा दिया करते थे। उन्होंने बताया कि जब से निधि आना शुरू हुई है, तब से नेताओं ने कमाई करना शुरू कर दी है। इसलिए नेता ज्यादा से ज्यादा पैसा खर्च करके चुनाव जीतना चाहते हैं।
