रामपुर : पांच साल ठप रहे विकास के काम, जानिए क्यों?

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अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की चर्चित सीटों में से एक स्वार-टांडा के लोग पांच साल विकास कार्यों के लिए तरसते रहे। 2017 का विधान सभा चुनाव होने के ढाई साल बाद अब्दुल्ला आजम की विधायकी हाईकोर्ट ने रद कर दी थी। इसके बाद विधानसभा सीट जनप्रतिनिधि विहीन हो गई। उपचुनाव इसलिए नहीं हुए क्योंकि अब्दुल्ला …

अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की चर्चित सीटों में से एक स्वार-टांडा के लोग पांच साल विकास कार्यों के लिए तरसते रहे। 2017 का विधान सभा चुनाव होने के ढाई साल बाद अब्दुल्ला आजम की विधायकी हाईकोर्ट ने रद कर दी थी। इसके बाद विधानसभा सीट जनप्रतिनिधि विहीन हो गई। उपचुनाव इसलिए नहीं हुए क्योंकि अब्दुल्ला ने विधायकी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी।

अब्दुल्ला के सांसद पिता आजम खां भी कई मामलों में जेल में बंद हैं। उनके साथ खुद अब्दुल्ला भी जेल में हैं। उनकी मां शहर विधायक डॉ. तजीन फात्मा कुछ दिन पहले जमानत पर रिहा हुई हैं। आजम ने हाल ही में जेल से ही टांडा की 23 सड़कों के लिए प्रस्ताव भेजे हैं। इस सीट पर अभी समीकरण किसी एक के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से अब्दुल्ला आजम को उम्मीदवार बनाया गया था।

बीजेपी ने लक्ष्मी सैनी और बीएसपी ने नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को मैदान में उतारा था। स्वार-टांडा सीट से पहली बार अब्दुल्ला आजम खां ने जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही वह सबसे कम उम्र के विधायक बने थे। अब्दुल्ला को तब 106268 वोट मिले थे और लक्ष्मी सैनी को 53169 मत प्राप्त हुए थे। इस तरह अब्दुल्ला ने यह चुनाव 53099 वोटों से जीता था। नवेद मियां तीसरे स्थान पर रहे थे। चुनाव नतीजों के बाद बीएसपी प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान ने अब्दुल्ला आजम खान की कम उम्र को लेकर सवाल उठाए। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। तमाम सबूतों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को स्वार-टांडा विधानसभा सीट का निर्वाचन रद करने का आदेश दे दिया था।

विधायक निधि रोक दी गई थी : हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब्दुल्ला सुप्रीम कोर्ट गए और तबसे यह मामला लंबित है। इस वजह से यहां उपचुनाव भी नहीं हो सके। अब्दुल्ला इसी मामले में जेल भी गए। उन पर कई और मामले भी दर्ज हैं। करीब 22 माह से वह सीतापुर जेल में बंद हैं। कोई विधायक न होने के चलते इस क्षेत्र में विकास कार्य रुके हुए हैं। विधायक निधि की धनराशि भी नहीं मिल रही है। इसमें हर साल तीन करोड़ रुपये मिलते हैं। सांसद आजम खां ने एक सप्ताह पहले हालांकि जेल से 23 सड़कों के प्रस्ताव जेल से ही भेजे हैं।

अब्दुल्ला के मुकाबले नवाबजादा हैदर अली हैं दावेदार
टांडा स्वार सीट से अभी तक यह तय माना जा रहा है कि अब्दुल्ला आजम सपा से इस बार भी मैदान में उतरेंगे। वहीं नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के बेटे नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां कांग्रेस से मजबूत दावेदार हैं, जबकि भाजपा से किसे टिकट दिया जाएगा, स्थिति साफ नहीं है। क्योंकि पिछली बार लक्ष्मी सैनी को भाजपा ने मैदान में उतारा था। भाजपा से टिकट के लिए बहुत से लोग दावेदारी कर रहे हैं। इन हालात में स्वार टांडा सीट पर समीकरण किसी के पक्ष में नहीं हैं। इस सीट पर अब्दुल्ला और हमजा मियां दो युवा नेता आमने सामने होंगे, जोकि कांग्रेस और सपा के दो कद्दावर नेताओं के बेटे हैं।

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