संभल में एक साथ होता था दो विधायकों का चुनाव

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धर्मेंद्र सिंह/अमृत विचार। 1952 में संभल विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ। इसमें एक विधान सभा सीट पर दो विधायक चुने गए। उस वक्त अनुसूचित जाति के लिए कोई आरक्षित सीट नहीं हुआ करती थी, इसलिए सामान्य और अनुसूचित जाति के दो अलग-अलग विधायक बनाने का प्रावधान था। सामान्य श्रेणी से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे साहू …

धर्मेंद्र सिंह/अमृत विचार। 1952 में संभल विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ। इसमें एक विधान सभा सीट पर दो विधायक चुने गए। उस वक्त अनुसूचित जाति के लिए कोई आरक्षित सीट नहीं हुआ करती थी, इसलिए सामान्य और अनुसूचित जाति के दो अलग-अलग विधायक बनाने का प्रावधान था। सामान्य श्रेणी से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे साहू जगदीश सरन ने (केएमपीपी) पार्टी के महमूद हसन खां को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।

वहीं अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे लेखराज ने (केएमपीपी) के ही बिहारी लाला को हराकर अनुसूचित जाति के दूसरे विधायक बनने का गौरव हासिल किया था। कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों ने केएमपीपी पार्टी के दोनों उम्मीदवारों को हराकर कांग्रेस का परचम लहराया था। प्रदेश में 1952 में ऐसी 84 विधानसभाएं थी, जहां अनुसूचित जाति की सीट आरक्षित न होने के कारण एक विधान सभा पर दो विधायकों के लिए चुनाव कराया जाता था। सामान्य और अनुसूचित जाति के दो विधायक बनाए जाते थे। जनपद मुरादाबाद बिलारी विधानसभा पर दो विधायक रहे थे, जिसमें सामान्य से हरसहायमल और एससी के महीलाला को जनता ने विधायक बनाया था।

70 साल तक सिर्फ दो परिवारों के बीच घूमती रही यहां की राजनीति
संभल विधानसभा की राजनीति 70 सालों में सिर्फ दो परिवारों के बीच घूमती रही है। सन 1952 में आजादी के बाद से उत्तर प्रदेश की प्रथम विधानसभा के चुनाव के बाद अब तक के चुनावों में 17 बार में नौ बार यह सीट इकबाल महमूद के परिवार में रही। इसके अलावा चार बार डॉ. शफीकुर्रहमान वर्क चुने गए। बाकी चार बार अन्य पार्टियों के विधायक चुने गए थे। सन 1974 में डॉ. शफीकुर्रहमान वर्क ने इकबाल महमूद खां के पिता महमूद हसन खां को हराया था। सन 1991 में 17 साल बाद अपनी और अपने पिता की हार का बदला लेते हुए हलधर किसान के निशान से लड़ रहे डॉ. शफीकुर्रहमान को हराकर जीत हासिल की थी। सन 2002 में एक बार फिर आरपीडी से लड़ रहे डॉ. वर्क को सपा में रहते हुए इकबाल महमूद ने हराया था। सन 2007 में इकबाल महमूद के सामने रालोद से लड़ रहे डॉ. वर्क के बेटे मौलाना ममलूकुर्रहमान वर्क को पराजित कर जीत हासिल की थी। उसके बाद 2012 में भी इकबाल महमूद ही विधायक रहे। सन 2017 में एआईएमआई के प्रत्याशी के रूप में लड़ रहे डॉ. वर्क के पौत्र जियाउर्रहमान वर्क को भी हराकर संभल विधानसभा के विधायक बने थे।

 

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