बरेली: सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहीं रोडवेज की बसें
बरेली, अमृत विचार। रोडवेज की बसे सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही हैं। फटे हुए टायर और टूटे इंडीगेटर के सहारे चलने वाली बसें कब हादसे का शिकार हो जाए कोई नहीं जानता। वहीं बसों में लगे फस्ट एड बाक्स भी गायब हैं। अगनिशमन यंत्र भी कई बसों में नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है …
बरेली, अमृत विचार। रोडवेज की बसे सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही हैं। फटे हुए टायर और टूटे इंडीगेटर के सहारे चलने वाली बसें कब हादसे का शिकार हो जाए कोई नहीं जानता। वहीं बसों में लगे फस्ट एड बाक्स भी गायब हैं। अगनिशमन यंत्र भी कई बसों में नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से शासन की तरफ से नई बसें मुहैया नहीं होने से पुरानी बसों को ही मरम्मत के बाद सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। वहीं अधिकतर बसों के शीशे खराब होने से सर्दी के मौसम में रात में सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अमृत विचार की टीम गुरुवार को रोडवेज बसों की हालत देखने के लिए शहर के पुराना और सेटेलाइट बस अड्डे पर पहुंची। पुराने रोडवेज बस अड्डे पर खड़ी रुहेलखंड डिपो की यूपी 25 टी 7442 बस में फस्ट एड बाक्स ही नहीं था। वहीं बस के इंडिगेटर भी टूटे हुए थे। वहीं रुहेलखंड डिपो की बस नंबर संख्या यूपी 25 एटी 1545 में फाग लाइट ही नहीं लगी हुई थी। उसके शीशे भी टूटे हुए थे। इसके अलावा इंडीगेटर और नट बोल्ट न होने से हादसे का खतरा बढ़ा हुआ है।
रुहेलखंड डिपो के यूपी 78 एफटी 9017 में फस्ट एड बाक्स में दवा की जगह नट बोल्ट और कपड़े भरे हुए थे। वहीं कई बसों में नट बोल्ट ढीले होने के बाद उनके टायर भी उम्र पूरी होने के चलते फट चुके हैं। चालक और परिचालकों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी अधिकारी बसों की मरम्मत नहीं करा रहे हैं। आरएम का कहना है कि फस्ट एड बाक्स में दवा न रखकर अब परिचालकों के बैग में रखी जा रही है।
बरेली रीजन में हैं 665 बसें
बरेली रीजन में कुल 665 बसें है। जिसमें निगम की 561 और अनुबंधित बसों की संख्या 104 है। इसके अलावा जनरथ बसों की संख्या 31 और शताब्दी बसों की संख्या 23 है। 665 बसों में 198 बरेली डिपो, 193 रुहेलखंड डिपो, 169 बदायूं डिपो, 105 पीलीभीत डिपो की हैं।
रोडवेज आरएम आर के त्रिपाठी
मुख्यायल से लंबे समय से नई बसें उपलब्ध नहीं हुई हैं। ऐसे में पुरानी बसों को ही मरम्मत के बाद सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। अगर कुछ बसों में खराबी है तो उन्हे चिन्हित करने के बाद ठीक कराया जाएगा। -आरके त्रिपाठी, आरएम
