मुरादाबाद : पार्टियों के दरवाजे पर ठिठके दावेदारों के पांव
आशुतोष मिश्र/ मुरादाबाद,अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन का दम भरने वाले राजनीतक दलों के पांव अभी ठिठके हुए हैं। उम्मीदवार चयन की रणनीति गुप्त रखने में सभी दल एक- दूसरे की ओर टकटकी लगाए हैं। भाजपा सत्ता बरकरार रखने का दावा कर रही है। समाजवादी पार्टी स्वयं को असरदार विकल्प के रूप में प्रस्तुत …
आशुतोष मिश्र/ मुरादाबाद,अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन का दम भरने वाले राजनीतक दलों के पांव अभी ठिठके हुए हैं। उम्मीदवार चयन की रणनीति गुप्त रखने में सभी दल एक- दूसरे की ओर टकटकी लगाए हैं। भाजपा सत्ता बरकरार रखने का दावा कर रही है। समाजवादी पार्टी स्वयं को असरदार विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रही है। बसपा के अपने दावे हैं और कांग्रेस राजनीति में बड़े बदलाव का नारा उछाल रही है। लेकिन, चुनावी मैदान के चेहरे अभी सामने नहीं आए हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा का दो सीटों पर कमल खिल पाया था। पार्टी को सीधी लड़ाई में बड़ी मुश्किल से सफलता मिली। शहर विधानसभा क्षेत्र से रितेश गुप्ता और कांठ में राजेश कुमार चुन्नू जीते। जबकि बिलारी में सपा ने अपनी जीत की यात्रा जारी रखी। हाजी रिजवान लगातार तीसरी बार चुने गए। बिलारी में मोहम्मद फहीम ने विजय अभियान जारी रखा।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में प्रतिष्ठा की लड़ाई राजपाल सिंह चौहान सपा के विधायक नवाब जान खान से हार गए। देहात विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हरिओम शर्मा दूसरे स्थान पर रहे। सपा के जिलाध्यक्ष रहे हाजी इकराम कुरैशी ने जीत हासिल की। छह विधानसभा क्षेत्रों में सपा और भाजपा की सीधी लड़ाई रही। बसपा ने अपने दमखम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
लेकिन, प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया अटकी पड़ी है। अलबत्ता बिलारी क्षेत्र से प्रत्याशी रहे अनिल चौधरी को फिर प्रभारी बनाया गया है। कुंदरकी सीट पर राजनीति में नए चेहरे चांद बाबू मलिक को मौका दिया है। मुरादाबाद शहर, देहात, कांठ और ठाकुरद्वारा में पार्टी की उम्मीदवारों की खोज पूरी नहीं हो पाई है। सपा ने हारी सीटों पर कार्यकर्ताओं से आवेदन मांगे थे। ऐसे में कांठ और सदर विधानसभा क्षेत्र पर आवेदनों की भरमार है।
कांग्रेस ने चार माह पहले ही प्रत्याशियों की घोषणा का ऐलान किया था। लेकिन, टिकट वितरण में 40 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी के ऐलान ने कांग्रेस के हाथ बांध दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी के दो विधायक हैं। चार सीटों पर पार्टी चेहरा बदलेगी या उन्हीं पर दाव लगाएगी। यह सार्वजनिक होना बाकी है। यानी कि मिशन 2022 के सत्ता संग्राम में किसी भी राजनीतिक दल
ने पत्ते नहीं खोले हैं।
पार्टी परख में सपाई दावेदारों का पास होना बाकी
मुरादाबाद। टिकट को लेकर चर्चा में रहने वाली समाजवादी पार्टी दावेदारों की परख में जुटी है। यहां सपा निर्वाचित सीटों को लेकर चर्चा में है। पार्टी का निर्णय क्या होगा? इसे लेकर कोई पुष्ट दावा नहीं करता। लेकिन, यहां के तीन विधायकों के टिकट को लेकर चौपाल गुलजार है। आधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान नहीं हो पाया है कि को टिकट कौन पाएगा। किसे विधायकी की जंग से खुद को रोकना होगा। सूत्रों की मानें तो एक विधायक पर एडीआर (एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म) की टेढ़ी दृष्टि हो गई है। जबकि, एक अन्य विधायक की हैसियत का आकलन पार्टी भाजपाई पैमाने से कर रही है। जबकि पार्टी में गहरी पैठ रखने वाले विधायक यह मानने को तैयार नहीं कि उन्हें पार्टी दुबारा मौका नहीं देगी। महज एक विधायक के टिकट पक्का होने की चर्चा है।
