कस्तूरबा गांधी स्कूलों में रहन-सहन और मेडिकल की सुविधाओं में हुआ खेल, जानें पूरा मामला…
रायबरेली। बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए प्रदेश में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। शिक्षा से लेकर रहने, खाने और स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं बालिका शिक्षा की इस बड़ी व्यवस्था में करोड़ों का खेल भी हो रहा है। प्रदेश में जब जांच की …
रायबरेली। बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए प्रदेश में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। शिक्षा से लेकर रहने, खाने और स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं बालिका शिक्षा की इस बड़ी व्यवस्था में करोड़ों का खेल भी हो रहा है। प्रदेश में जब जांच की गई तो रायबरेली समेत 18 जिलों में गड़बड़ी मिली है। बताते हैं कि पिछले साल मई में कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में करीब 63 लाख के गोलमाल का प्रकरण सामने आया शासन स्तर से इसकी जांच कराई गई।
वहीं, स्थानीय स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी ने जांच कराकर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी। करीब सात महीने बाद अब कार्रवाई शुरू हो गई है। निदेशक राज्य परियोजना ने प्रकरण में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (एएओ) को हटाकर मूल विभाग भेजने के निर्देश दिए हैं।
बताते हैं कि रायबरेली समेत 18 जिलों में गड़बड़ी पकड़ी गयी है। बरेली में 84.12 लाख, बिजनौर 74.88, देवरिया 68.05, फतेहपुर 31.16 व गोंडा में 96.98 लाख की गड़बड़ी मिली। कासगंज में 31.74 लाख, मऊ 23.96, मेरठ 26.43, मुरादाबाद 39.14, प्रतापगढ़ 76.31 , संतकबीर नगर 38.89, श्रावस्ती 26.44, सोनभद्र 46.18, सुलतानपुर 44.86, उन्नाव 47.80, वाराणसी 37.05 और गाजियाबाद में 18 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है।
राज्य परियोजना निदेशक ने एएओ को हटाने के दिए निर्देश
राज्य परियोजना निदेशक अनामिका सिंह के पत्र में मुख्य विकास अधिकारी की ओर से पांच जून 2021 को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की जांच आख्या में तथ्यों का हवाला दिया गया। इसमें पदीय वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में अरुचि, उत्तरदायित्वहीनता, शासकीय धन के व्यय में अनियमितता, विभागीय और वित्तीय निर्देशों की अवहेलना एवं उच्चाधिकारियों से तथ्य छिपा कर शासकीय निधि के अपव्यय में दोषी पाया गया। निदेशक ने रायबरेली में एएओ पद पर तैनात अनुपम वाजपेयी को तत्काल प्रभाव से मूल विभाग माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश में प्रत्यावर्तित करने और बीएसए को कार्यभार किसी अन्य को हस्तगत कराने के निर्देश दिए हैं।
खाना, मेडिकल और स्टेशनरी के मद में हुआ खेल
असल में कोरोना महामारी के कारण विद्यालय महज 47 दिन के लिए खुले। जबकि 63 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। सबसे आश्चर्य की बात यह रही की छात्राओं की उपस्थिति को प्रेरणा पोर्टल पर फीड ही नहीं किया गया। मामला खुला तो भोजन, मेडिकल और स्टेशनरी आदि से संबंधित दस्तावेज जांचे गए। इसमें तमाम खामियां मिलीं।
कस्तूरबा विद्यालयों के खर्च पर नजर
कुल विद्यालय- 16
उच्चीकृत विद्यालय- 02
पंजीकृत छात्राएं- 1724
फरवरी और मार्च 2021 में संचालित कक्षाएं- 47 दिन
भोजन पर कुल खर्च- 3558584
भोजन पर फरवरी 2021 में खर्च- 1896152
भोजन पर मार्च 2021में खर्च- 1662432
मेडिकल पर प्रति विद्यालय खर्च- एक लाख
स्टेशनरी पर प्रति विद्यालय खर्च- 1.20 लाख
सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को कार्यमुक्त करने के लिए पत्र मिला है। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कदम उठाया जाएगा। कस्तूरबा विद्यालयों संबंधी प्रकरण मेरे कार्यकाल का नहीं है। –शिवेंद्र प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
