बरेली: अक्षर विहार में किन शर्तों पर दे दिया गया कैंटीन के लिए फर्म को ठेका

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बरेली, अमृत विचार। अक्षर विहार के संरक्षित किए गए तालाब के पास कैंटीन का ठेका दिए जाने और उससे खाने-पीने की चीजें तालाब में जाने से पानी के दूषित होने को लेकर प्रकृति प्रेमी और जागरूक लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल में आरटीआई एक्टिविस्ट खालिद जिलानी ने तालाब की दशा को लेकर …

बरेली, अमृत विचार। अक्षर विहार के संरक्षित किए गए तालाब के पास कैंटीन का ठेका दिए जाने और उससे खाने-पीने की चीजें तालाब में जाने से पानी के दूषित होने को लेकर प्रकृति प्रेमी और जागरूक लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल में आरटीआई एक्टिविस्ट खालिद जिलानी ने तालाब की दशा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए नगर आयुक्त से कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी कि अक्षर विहार पार्क में कैंटीन संचालन और तालाब के रखरखाव को एक निजी फर्म को किन शर्तों पर दे दिया गया है। हालांकि, उनका कहना है कि यह सूचना मांगे काफी समय हो गया है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी इन बिंदुओं की सूचनाएं दबाए बैठे हैं।

अक्षर विहार का काफी बड़ा तालाब है। हरियाली और शांत जगह पर बीच बने इस तालाब में सर्दी के दिनों में विदेशी पक्षी आते थे। तालाब का पानी स्वच्छ था। नगर निगम ने इस तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर अमृत योजना से करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा यहां एसटीपी यानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित दूसरी व्यवस्थाओं के लिए मोटी रकम खर्च की जा रही है। पार्क के रखरखाव के लिए एक फर्म को 10 साल के लिए कैंटीन के संचालन का कांट्रेक्ट दे दिया गया है, लेकिन पार्क के अंदर कैंटीन चलने के जहां काफी गंदगी हो रही है, वहीं तालाब में भी खाने-पीने की चीजें गिरने से उसका पानी लगातार दूषित होने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

इस मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट खालिद जिलानी ने नगर आयुक्त से तीन बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थीं। इसमें पहला बिंदु यह था कि वर्ष 2016 से अब तक अक्षर विहार पार्क व तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर कब-कब और कितनी धनराशि खर्च की गई है। दूसरे बिंदु में अक्षर विहार पार्क में कैंटीन संचालन, पार्क व तालाब आदि के रखरखाव व अन्य कार्यों के लिए किस निजी फर्म को और किन शर्तों पर कांट्रेक्ट दिया गया है। इसके अलावा तालाब की भूमि पर कब्जेदारों को लेकर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।

पूर्व पार्षद भी शासन तक पहुंचा चुके हैं मामला
पूर्व पार्षद व अधिवक्ता राजेश तिवारी भी पार्क व तालाबों के मूल स्वरूप को बदलने और उसमें व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करने को लेकर कई बार शासन तक पत्र भेज चुके हैं। इसमें अक्षर विहार पार्क में भी हलचल बढ़ने और उसके सौंदर्यीकरण के नाम पर मूल स्वरूप में छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया गया था, लेकिन अफसोस, अधिकारियों की ओर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अक्षर विहार का जल्द दौर करने जाएगी निगम की टीम
अक्षर विहार के तालाब की सफाई सहित अन्य रखरखाव को लेकर क्या स्थिति है‌? इसके लिए नगर निगम की टीम जल्द ही यहां दौरा करने जाएगी। एक्सईएन संजीव प्रधान ने कहा कि मौके पर पहुंचकर जायजा लेने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। अक्षर विहार तालाब और पार्क में नगर निगम ने व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन शुरू करा दिया है। ये किस आधार पर कराया गया है? इस संबंध में सूचनाएं मांगी गई हैं। हालांकि, नगर निगम देने में देरी कर रहा है। अब इस अपील आगे पहुंचाया जाएगा।

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