अयोध्या: आरटीआई का जवाब न देने पर सीवीओ पर लगा 25 हजार का अर्थदंड, जानें मामला
अयोध्या। जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को आरटीआई का जवाब न देने व सूचना आयोग कैंप में अनुपस्थित रहने के कारण उन पर 25 हजार का अर्थदंड लगाया गया है। अपीलकर्ता चंद्रशेखर शुक्ल ने 13 फरवरी 2020 को जनसूचनाधिकारी अयोध्या के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) के पास सूचना का अधिकार के तहत आवेदन किया …
अयोध्या। जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को आरटीआई का जवाब न देने व सूचना आयोग कैंप में अनुपस्थित रहने के कारण उन पर 25 हजार का अर्थदंड लगाया गया है। अपीलकर्ता चंद्रशेखर शुक्ल ने 13 फरवरी 2020 को जनसूचनाधिकारी अयोध्या के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) के पास सूचना का अधिकार के तहत आवेदन किया था।
जनसूचनाधिकारी द्वारा अपीलकर्ता को उसके मूल आवेदन के क्रम में वांछित सूचनाएं नियमानुसार न उपलब्ध कराये जाने पर आवेदक ने 12 मार्च को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील योजित की। प्रथम अपीलीय द्वारा भी अपीलकर्ता की प्रथम अपील का नियमानुसार निस्तारण नहीं किया गया। अपीलकर्ता द्वारा आयोग से जनसूचनाधिकारी द्वारा सूचनाएं दिलाए जाने अनुरोध किया है। सुनवाई में अपीलकर्ता द्वारा आयोग की पत्रावली पर टिप्पणी अंकित की गई है कि कोई सूचना प्राप्त नहीं है।
पत्रावली का परिशीलन करने पर पाया गया कि प्रतिपक्षी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी विकास भवन को आयोग के कार्यालय स 26 नवंबर 2021 को नोटिस निर्गत करते हुए निर्देशित किया गया था कि प्रस्तुत प्रकरण में अपीलकर्ता द्वारा आयोग में प्रस्तुत द्वितीय शिकायत आयोग द्वारा पारित आदेश, जिसकी प्रति इस नोटिस के साथ संलग्न कर दी गई, जिसकी एक प्रति शिकायतकर्ता को पंजीकृत डाक से भेजते हुए उक्त सुनवाई दिनांक में दो प्रतियों में अपना लिखित अभिकथन स्वयं व अपने प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। यदि उनके द्वारा अभी तक सूचनाएं नहीं दी गई है तो प्राथमिकता पर या तो सूचनाएं अपीलकर्ता को भेजें या विधिक कारण बताएं कि सूचना क्यों नहीं दी गई।
फिर भी प्रतिपक्षी जनसूचनाधिकारी न तो उपस्थित हुए और न ही उनके द्वारा सूचना के सम्बन्ध में कोई पत्राचार ही आयोग से किया गया। इसके बाद प्रतिपक्षी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को नोटिस निर्गत किए जाने के बावजूद उक्त नोटिस के क्रम में आवेदक को वांछित सूचनाएं उपलब्ध न कराने व आयोग से कोई पत्राचार न करने का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से रुपए 25 हजार रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित करते हुए दण्ड वसूली के आदेश के साथ वाद निस्तारित किया है। रजिस्ट्रार, राज्य सूचना आयोग, गोमती नगर, लखनऊ को भी निर्देशित किया गया है।
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