रामपुर : सपा-बसपा के बीच रही लड़ाई, भाजपा तलाश रही जनाधार

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अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। प्रदेश की 35-चमरौआ विधानसभा सीट जिले की पांच विधानसभा सीटों में से एक है। यह सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद सृजित हुई थी। इस बार यहां विधानसभा का तीसरा चुनाव होगा। यहां मुख्य लड़ाई समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट …

अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। प्रदेश की 35-चमरौआ विधानसभा सीट जिले की पांच विधानसभा सीटों में से एक है। यह सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद सृजित हुई थी। इस बार यहां विधानसभा का तीसरा चुनाव होगा। यहां मुख्य लड़ाई समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से समाजवादी पार्टी के नसीर अहमद खान चुनाव जीतकर विधायक बने थे।

उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के यूसुफ अली को चुनाव हराया था, जबकि 2012 में हुए चुनाव में यूसुफ अली बसपा से विधानसभा में पहुंचे थे। यहां भाजपा 2012 में चौथे स्थान पर रही थी तो 2017 में तीसरा स्थान रहा था। अब भाजपा के नेता इस सीट पर अपना जनाधार तलाश रहे हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। लेकिन, अभी किसी राजनीतिक दल के की ओर से प्रत्याशियों का फैसला नहीं हुआ है।

माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी से मौजूदा विधायक नसीर खां ही प्रत्याशी रहेंगे। लेकिन, अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि उनका टिकट काटकर सपा किसी और को देना चाहती है। पहले बसपा से विधायक रह चुके यूसुफ अली इस बार कांग्रेस से टिकट के दावेदार हैं। वहीं बसपा से कौन मैदान में उतरेगा तय नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने 2012 के चुनाव में पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना को मैदान में उतारा था। तब उन्हें चौथे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा था।

तीसरे स्थान पर कांग्रेस प्रत्याशी मुतीउर्रहमान खां बबलू रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से नसीर अहमद खान ने बहुजन समाज पार्टी के यूसुफ अली को हराया था। भाजपा के मोहन कुमार लोधी तीसरे स्थान पर रहे थे। चूंकि कांग्रेस और सपा का गठबंधन था, इसलिए सीट सपा के खाते में चली गई थी। इस बार भाजपा इस मुस्लिम बाहुल्य सीट पर अपना जनाधार तलाश रही है।

मुस्लिम बहुल है यह सीट : इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या तीन लाख सात हजार 854 है। इनमें पुरुष मतदाता एक लाख 64 हजार (लगभग) और महिला मतदाता एक लाख 43 हजार (लगभग) हैं। यहां मुस्लिम मतदाता 40 फीसदी से अधिक हैं। वर्तमान में चमरौआ से विधायक नसीर अहमद खान जेल में बंद सांसद आजम खान के बेहद करीबी माने जाते हैं। चमरौआ सीट पर मुस्लिमों की तुर्क जाति का वोट बहुत ज्यादा है और इनके वोटों पर हर प्रत्याशी की नजर रहती है।

निर्णायक हैं मुस्लिम मतदाता
अगर आने वाले विधानसभा चुनाव की बात करें तो स्वार-टांडा विधानसभा सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या 40 प्रतिशत से ज्यादा है। इस सीट पर लोधी, दलित, सैनी, सरदार कई और पिछड़ी जातियों के वोटर भी हैं। लेकिन, जीत-हार के गणित पर मुसलमान वोटरों का काबू है। इस सीट के समीकरणों के बारे में लोगों का कहना है कि मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। हालांकि, पलड़ा समाजवादी पार्टी का ही भारी है। दरअसल, रामपुर जिले में सदर, स्वार और चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों में मोहम्मद आजम खान की बड़ा दखल है। तीनों सीटों पर मुसलमान वोटरों की संख्या भी आधे से ज्यादा है। ऐसे में भाजपा को अपने जनाधार को बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

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