मुरादाबाद : जनता ने चंदा इकट्ठा कर लड़ाया चुनाव, बने विधायक
अविक सिंह/ मुरादाबाद, अमृत विचार। बात सन 1980 के दशक की है। जब लोग अपने व्यक्तित्व और इमानदारी के लिए जाने जाते थे। उस दौर मे जनता, पार्टी नहीं बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तित्व देखकर वोट देती थी। उस समय प्रतिनिधि को चुनाव लड़ने के लिए रुपये की इतनी आवश्यकता नहीं होती थी, बल्कि जनता का …
अविक सिंह/ मुरादाबाद, अमृत विचार। बात सन 1980 के दशक की है। जब लोग अपने व्यक्तित्व और इमानदारी के लिए जाने जाते थे। उस दौर मे जनता, पार्टी नहीं बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तित्व देखकर वोट देती थी। उस समय प्रतिनिधि को चुनाव लड़ने के लिए रुपये की इतनी आवश्यकता नहीं होती थी, बल्कि जनता का विश्वास जताना पड़ता था।
ऐसे ही व्यक्तित्व के स्वामी थे चंदौसी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके स्व. जीराज सिंह मौर्या। वह अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जीते थे। उन्हें जनता ने चंदा इकट्ठा कर चुनाव लड़वाया था, जिसके बाद वह वह विजय प्राप्त कर विधायक बने थे। अमृत विचार से बातचीत में उनके पुत्र सिद्धार्थ भारत की मानें तो जब उनके पिता ने चुनाव लड़ा तो वह महज तीन साल के थे। वह बताते हैं कि उनके पिता की छवि प्रदेश में दलित नेता के रूप में थी। वह समाज के बीच रहना काफी पसंद करते थे और समाज को अपना समझते थे। ऐसे में समाज के लोग भी उन पर विश्वास करते थे। उन्होंने बताया कि सन 1980 में कांग्रेस पार्टी से उनके पिता को टिकट मिला। तब मुरादाबाद जिले में ही अमरोहा और चंदौसी विधानसभा आती थी।
25 मई 1980 में चुनाव प्रचार के लिए आई थीं इंदिरा गांधी : 41 साल पहले कांग्रेस पार्टी का दबदबा हुआ करता था। उस दौर में प्रत्याशी पूरी विधानसभा में पैदल घूम-घूम कर लोगों से जनसंपर्क किया करते थे। उसके बाद लोग उन्हें चुनते थे। चंदौसी विधानसभा-14 से चुनाव लड़े जीराज सिंह की जनसभा में चुनाव के लिए प्रचार करने 25 मई 1980 को इंदिरा गांधी आई थीं।
हर रोज लगता था जनता दरबार : जीराज सिंह के विधायक चुने जाने के बाद हर रोज उनके घर पर जनता दरबार लगाया जाता था। इसमें सुबह से लेकर शाम तक लोगों की समस्याएं सुनी जाती थीं। इस बीच प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहते थे, जो सभी जनता की समस्या को लिखकर 24 घंटे में उसका हल किया करते थे।
विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, लखनऊ से भी आते थे फरियादी : जीराज सिंह का व्यवहार ऐसा था कि फरियादी उनकी ओर अपने आप ही खिंचे चले आते थे। चाहे वह चंदौसी विधानसभा के हों या फिर लखनऊ के। उनके पुत्र के अनुसार एक दिन उनके पिता ने जनता दरबार में सुबह से लोगों की समस्यायें सुनने का क्रम शुरू किया, जो रात आठ बजे तक चलता रहा। इस दौरान वह लोगों की परेशानी सुनते और शासन के लिए एक के बाद एक चिट्ठी लिखवाते रहे।
लोकप्रियता
1. 1980 में चंदौसी सीट से चुनाव लडे़ थे जीराज मौर्या
2. उनके चुनाव प्रचार के लिए आई थीं इंदिरा गांधी
110 घंटे भूख हड़ताल पर बैठे, मुरादाबाद को मिली कमिश्नरी
जीराज सिंह मौर्य जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझते थे। यह उनका व्यवहार था। वह लोगों को बिल्कुल भी परेशान या इधर-उधर भटकता नहीं देख सकते थे। यह ही वजह थी कि उन्होंने जनता की समस्या को समझते हुए कमिश्नरी का मुद्दा उठाया। इसको लेकर वह 110 घंटे भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। उसके बाद उन्हें आला अधिकारियों से कमिश्नरी बनने का आश्वासन मिला था, जिसके कुछ समय बाद यहां के लोगों को कमिश्नरी मिल सकी थी।
