रामपुर : लहर में भी नहीं दौड़ा हाथी, खिला कमल
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की सुरक्षित विधानसभा सीट 38-मिलक-शाहबाद पर जहां सबसे ज्यादा कांग्रेस ने कब्जा बनाए रखा वहीं भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायक भी जीत दर्ज कराते रहे। लेकिन, सबसे खास बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी को यहां से कभी कामयाबी नहीं मिली। यहां तक की 2007 के विधानसभा चुनाव …
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की सुरक्षित विधानसभा सीट 38-मिलक-शाहबाद पर जहां सबसे ज्यादा कांग्रेस ने कब्जा बनाए रखा वहीं भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायक भी जीत दर्ज कराते रहे। लेकिन, सबसे खास बात यह है कि बहुजन समाज पार्टी को यहां से कभी कामयाबी नहीं मिली। यहां तक की 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा लहर थी, फिर भी हाथी यहां नहीं दौड़ा। इस साल यहां भाजपा का कमल खिला था। ऐसा नहीं है बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारे। हर बार उम्मीदवार पूरे दमखम के साथ लड़े। लेकिन, तीसरे स्थान पर ही सिमटकर रह गए।

वैसे तो शाहबाद सीट आजादी के बाद से ही अस्तित्व में आ गई थी। तब जिले में चार विधान सभा क्षेत्र रामपुर खास, मिलक-बिलासपुर, स्वार-टांडा और शाहबाद हुआ करते थे। 2008 में परिसीमन के बाद बिलासपुर से मिलक को अलग कर मिलक-शाहबाद (सुरक्षित) अलग हो गई। एक नई विधानसभा सीट चमरौआ सृजित की गई थी। मिलक-शाहबाद क्षेत्र के इतिहास पर नजर डालें तो एक रोचक जानकारी मिलती है, जिसमें बसपा को कभी यहां से कामयाबी मिलना तो दूर, दूसरा स्थान भी नहीं मिला। यहां तक की 2007 में जब मायावती की लहर थी, उस दौरान भी इस सीट पर मतदाताओं ने हाथी को दौड़ने से रोक दिया और कमल खिलाया था। इस चुनाव में बसपा प्रत्याशी चंद्रपाल 9700 वोट पाकर पांचवें स्थान पर रहे थे। 2007 के बाद भी जितने चुनाव हुए, उनमें बसपा को जनता ने खास महत्व नहीं दिया। 2017 के चुनाव तक यहां बसपा दूसरा स्थान कभी नहीं पा सकी। यहां के मतदाताओं की पसंद या तो साइकिल रही या कमल का फूल।

बराबर हैं हिंदू-मुस्लिम मतदाता : यहां एक बार सपा और एक बार बीजेपी से विधायक चुने गए। फिलहाल बीजेपी की राजबाला यहां से मौजूदा विधायक हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में साढ़े पांच लाख के करीब आबादी है और हिंदू- मुस्लिम बराबर संख्या में हैं। दोनों ही समुदाय चुनाव नतीजे में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 50 फीसदी है। 26 हजार वोटर ब्राह्मण वर्ग से, 20 हजार दलित, 7 हजार जाट और 20 हजार सैनी मतदाता हैं। लोधी-राजपूत वोटों की संख्या भी 20 हजार के करीब है।
2017 में भाजपा की राजबाला जीतीं : 2017 के चुनाव में बीजेपी ने यहां अच्छी वापसी की और पार्टी की प्रत्याशी राजबाला चुनाव जीतकर विधायक बनीं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह को हराया था। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को 89,861 वोट मिले थे, जबकि 73194 वोटों के साथ सपा दूसरे नंबर पर रही। बीएसपी तीसरे नंबर की पार्टी रही, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रपाल सिंह चौथे नंबर पर आए।
विधानसभा चुनाव में पार्टियों का वोट शेयर
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मिलक सीट से भाजपा का वोट शेयर 41.54 प्रतिशत था, जबकि सपा का 33.84 प्रतिशत रहा। वहीं तीसरे नंबर पर रही बसपा का वोट शेयर 18.16 प्रतिशत था, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रपाल सिंह का वोट प्रतिशत 3.66 था।
