पहली विधानसभा में आठ विधायकों ने रायबरेली में की थी नुमाइंदगी

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रायबरेली। जिले का राजनीतिक इतिहास खासा रोचक है। रायबरेली शुरु से ही कांग्रेस का गढ़ रहा। 1950 में जब संविधान बना और उसके बाद आम चुनाव की तैयारी शुरू हुई तो 1951-52 में विधानसभा के पहले चुनाव में रायबरेली जिले में आठ विधानसभाओं से विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे। क्षेत्रफल की दृष्टि से रायबरेली बड़ा …

रायबरेली। जिले का राजनीतिक इतिहास खासा रोचक है। रायबरेली शुरु से ही कांग्रेस का गढ़ रहा। 1950 में जब संविधान बना और उसके बाद आम चुनाव की तैयारी शुरू हुई तो 1951-52 में विधानसभा के पहले चुनाव में रायबरेली जिले में आठ विधानसभाओं से विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे।

क्षेत्रफल की दृष्टि से रायबरेली बड़ा जिला था और उस समय अमेठी भी इसी का हिस्सा था। ऐसे में जिले को चार क्षेत्रों में विभाजीत कर आठ विधानसभाओं का सजृन किया गया था। पहले विधानसभा चुनाव में कोई भी विधानसभा आरक्षित नहीं थी। वहीं 32 फीसद मतदाताओं ने मतदान कर विधायकों को चुनकर विधानसभा पहुंचाया था।

रायबरेली में विधानसभा का पहला चुनाव कांग्रेस और भारतीय जनसंघ के बीच लड़ा गया था। कांग्रेस ने चुनाव में सभी आठ विधानसभाओं में जीत हासिल की थी। असल में आजादी की जंग के दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं की गतिविधियां रायबरेली में होती रहती थीं। असयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने लालगंज में बैठक की थी जो आज गांधी चौक के नाम से प्रसिद्ध है।

वहीं 7 जनवरी 1921 को किसान आंदोलन के दौरान 750 किसानों को गोलियों से भून दिया गया था। तब जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र रायबरेली आए थे और उसी के बाद से रायबरेली कांग्रेस का घर बनता गया। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सरेनी स्थित घर पर कांग्रेस के नेता मंत्रणा करने आते थे। जब देश आजाद हुआ तो रायबरेली राजनीतिक लिहाज से कांग्रेस का मजबूत गढ़ बन गया।

विधानसभा का जब पहला चुनाव हुआ तो जिले में डलमऊ दक्षिण, डलमऊ पूर्व, रायबरेली-डलमऊ उत्तर, रायबरेली-डलमऊ पश्चिम, महराजगंज पश्चिम, महराजगंज, सलोन उत्तर और सलोन दक्षिण विधानसभा थीं। असल में अमेठी के हिस्से को सलोन की दो विधानसभा, रायबरेली कस्बा को दो विधानसभाओं में समाहित किया गया। वहीं प्राचीन नगरी और राजा डल के नगर डलमऊ को दो विधानसभाओं में बांट दिया गया।

इसी तरह महराजगंज क्षेत्र को भी दो विधानसभाओं में बांटा गया। इसका मुख्य उद्देश्य था कि रायबरेली के हर क्षेत्र के लोगों की नुमाइंदगी करने वाला विधायक विधानसभा में पहुंचे। उस दौरान सभी आठों विधानसभाओं में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वहीं 202576 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। केवल 32 फीसद मतदाता बूथ पर वोट डालने गए थे।

चार माह चला था चुनाव प्रचार

पहले विधानसभा चुनाव में प्रचार चार माह तक चला था। तब न बाइक होती थीं और न ही कार। प्रत्याशी पैदल ही मतदाताओं से संपर्क करते थे। यही कारण होता था कि प्रचार में समय अधिक लगता था।

पहले विधानसभा चुनाव के परिणाम पर नजर

डलमऊ दक्षिण- विजेताः गुप्तार सिंह (कांग्रेस), मतः 22093

रनरः बहादुर सिंह (भारतीय जनसंघ), मतः 3454

डलमऊ पूर्व- विजेताः चंद्रपाल (कांग्रेस), मतः 18076

रनरः संतराम (निर्दलीय), मतः 6315

रायबरेली-डलमऊ उत्तर- विजेताः राम प्रसाद (कांग्रेस), मतः 25500

रनरः श्याम नरायण (भारतीय जनसंघ), मतः 7247

रायबरेली-डलमऊ पश्चिम- विजेताः राम शंकर (कांग्रेस), मतः 27116

रनरः श्याम दास (निर्दलीय), मतः 7353

महराजगंज पश्चिम- विनरः राम स्वरूप विषारद (कांग्रेस), मतः 17433

रनरः राम सरन सिंह (भारतीय जनसंघ), मतः 7707

महराजगंज- रामेश्वर (कांग्रेस), मतः 17169

रनर- राम किशन (निर्दलीय), मतः 5981

सलोन उत्तर- वसी नकवी (कांग्रेस), मतः 12977

रनर- अष्टभुजा बक्श सिंह (निर्दलीय), मतः 2911

सलोन दक्षिण- दल बहादुर सिंह (कांग्रेस), मतः 15574

रनर- शिव प्रसाद पासी (सोशलिस्ट पार्टी), मतः 4667

कुल मतदान- 202576

मतदान प्रतिशत- 32 फीसद

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