मुरादाबाद : कोविड मरीजों को बांटीं एक्सपायर दवाएं, जान से खिलवाड़
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार न तो कोरोना की रोकथाम के लिए गंभीर हैं, न ही संक्रमित मरीजों के इलाज में सतर्कता बरत रहे हैं। संक्रमित मरीजों की किट में एक्सपायर दवा बांट दी गई। इससे संक्रमित मरीज और उनके परिवार वाले बीमारी से पहले ही सहमे हुए थे, एक्सपायर दवा देख …
विनोद श्रीवास्तव/मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार न तो कोरोना की रोकथाम के लिए गंभीर हैं, न ही संक्रमित मरीजों के इलाज में सतर्कता बरत रहे हैं। संक्रमित मरीजों की किट में एक्सपायर दवा बांट दी गई। इससे संक्रमित मरीज और उनके परिवार वाले बीमारी से पहले ही सहमे हुए थे, एक्सपायर दवा देख उनकी चिंता और भी बढ़ गई है। चिकित्साधिकारी लापरवाहों पर कार्रवाई करने के बजाय खामियों पर पर्दा डालने में लगे हैं।
कोरोना संक्रमण जिले में तेजी से फैलने के बाद स्वास्थ्य महकमा गंभीर नहीं हो रहा है। हर दिन सैकड़ों मरीजों के संक्रमण की जद में आ रहे हैं। उनके बेहतर इलाज के बजाय आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित मिले एक हजार से अधिक मरीजों को जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों से जो मेडिसिन किट बांटी गई, उनमें एक्सपायर दवाएं मिली हैं। इस किट में जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल आईपी टेबलेट भी शामिल है, जिसकी एक्सपायरी जनवरी 2022 है।
आज भी इसे हटाने के बजाय बांटने का काम जारी है। यह दवा फरवरी 2020 में निर्मित है। इस एक्सपायर दवा को देखकर कोरोना संक्रमित मरीज और उनके परिवार वाले और चिंता में पड़ रहे हैं। कई रोगियों के परिजनों ने किट में एक्सपायरी दवाओं को देखकर उन्हें बाहर फेंक दिया तथा मेडिकल स्टोर्स से खुद दवा खरीदीं तो बहुतों ने निजी चिकित्सकों की सलाह से दूसरी दवा लेकर अपनी जान बचाने का जतन शुरू कर दिया है। किट में कई और दवाएं है, जिनकी एक्सपायरी तिथि आगामी महीनों की ही है। चिकित्साधिकारी लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के बजाय पर्दा डालने में जुटे हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार कहते हैं कि दवा की एक्सपायरी जनवरी तक है तो चल जानी चाहिए। अस्पताल प्रशासन का बचाव करते हुए उनका कहना था कि यह किट मुख्य चिकित्साधिकारी के सीएमएसडी स्टोर से तैयार कर भेजी गई थी, इसकी जानकारी उन्हें देंगे।
चिकित्सक की राय, कम हो जाता है दवा का असर
दवा की एक्सपायरी से उसका असर कम हो जाता है। कई दवाएं बेअसर हो जाती है। गंभीर मरीजों को एक्सपायर दवा देने से पहले सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि कोरोना संक्रमित मरीज को जिंक सल्फेट डिस्पर्सिबल आईपी टेबलेट दी जा रही है, जो इम्यूनिटी बूस्टर का काम करती है। ऐसे में उसकी क्वालिटी और एक्सपायरी पर भी नजर होनी चाहिए। -डॉ. रवि गंगल, अध्यक्ष मुरादाबाद नर्सिंग होम एसोसिएशन
