लखनऊ: एकेटीयू के नये कुलपति प्रो. पीके मिश्रा ने पदभार संभाला

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लखनऊ। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एकेटीयू में शनिवार को बतौर कुलपति प्रोफेसर पीके मिश्रा ने पदभार ग्रहण कर लिया। इस मौके पर उन्होंने अमृत विचार से बातचीत में कहा कि कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत प्रथम और द्वितीय वर्ष की आगामी परीक्षाओं के ऑनलाइन संचालन पर विचार किया जाएगा। एकेटीयू में है विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर  …

लखनऊ। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एकेटीयू में शनिवार को बतौर कुलपति प्रोफेसर पीके मिश्रा ने पदभार ग्रहण कर लिया। इस मौके पर उन्होंने अमृत विचार से बातचीत में कहा कि कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत प्रथम और द्वितीय वर्ष की आगामी परीक्षाओं के ऑनलाइन संचालन पर विचार किया जाएगा।

एकेटीयू में है विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर 

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि एकेटीयू में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर है। साथ ही पर्याप्त मानवसंसाधन भी हैं। प्रो मिश्रा ने कहा कि लखनऊ से वह परिचित हैं। साथ ही लखनऊ की इंडस्ट्री के साथ काम भी किया है। उन्होंने कहा अभी एकेटीयू के विषय में समझूंगा और फिर विवि की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करूंगा तथा जो कमियां रह गयी है उन्हें दूर करूंगा।

प्रो मिश्रा ने कहा कि इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एवं स्टार्टअप के लिए प्रयास तेज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन्क्यूबेशन के लिए वर्ष 2006 से निरन्तर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्क्यूबेशन के अग्रिम चरण के रूप में रूरल इंटरप्रन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य किया जाएगा।

बाद में भी छात्रों को मिलेगा परीक्षा का मौका

नये कुलप​ति ने कहा कि 17 जनवरी को आयोजित होने वाली परीक्षाओं के सम्बन्ध में जो छात्र परीक्षा नहीं देना चाहते उनकी परीक्षाएं बाद में कराई जाएगी। प्रो. मिश्रा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रभाव के कम होने पर रूरल इंटरप्रन्योरशिप पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें इस क्षेत्र में सफल कार्य कर रहे पेशेवरों के साथ अपने छात्रों का संवाद भी स्थापित किया जाएगा।

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गुणवत्ता के साथ संख्यात्मक वृद्धि जरूरी

प्रो. मिश्रा ने कहा कि गुणवत्ता के साथ संख्यात्मक वृद्धि भी जरूरी है। क्योंकि निजी संस्थानों में प्रवेश की संख्या पूर्ण होने से ही उनकी वित्तीय स्थितियों में सुधार हो सकता है। प्रो. मिश्रा ने कहा 1905 तक भारत की साक्षरता दर बहुत अधिक थी। सामाजिक उत्थान एवं पुनर्वास के लिए शिक्षा का व्यापक उपयोग किया जाता था। उन्हीं उद्देश्यों का समावेश करते हुए नई शिक्षा नीति लायी गयी है।

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