अपने ही गढ़ में अब हांफ रही हाथी, कभी हुआ करता था सभी विधानसभाओं पर कब्जा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट…
अम्बेडकर नगर जिले को अस्तित्व में लाने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अपने ही गढ़ में सियासी हाशिए पर दिखाई दे रही है। वर्तमान में जब विधानसभा चुनाव की चुनौती सामने है तो बसपा के पास जिले में पार्टी के खेवनहारों का संकट खड़ा है। जिन सियासी सूरमाओं की बदौलत बसपा ने जिले में अपनी …
अम्बेडकर नगर जिले को अस्तित्व में लाने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अपने ही गढ़ में सियासी हाशिए पर दिखाई दे रही है। वर्तमान में जब विधानसभा चुनाव की चुनौती सामने है तो बसपा के पास जिले में पार्टी के खेवनहारों का संकट खड़ा है। जिन सियासी सूरमाओं की बदौलत बसपा ने जिले में अपनी सियासी जड़े मजबूत की थीं आज उनमें से अधिकतर दूसरे दल में है।
1995 में बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने फैजाबाद जिले को विभाजित कर अकबरपुर को अम्बेडकरनगर जिले में तब्दील किया था। उसी के बाद से यह बसपाई गढ़ माने जाने लगा।

अम्बेडकरनगर जिला बनने से पहले यहां अकबरपुर के नाम से लोकसभा सीट जानी जाती थी। 1994 में बसपा के टिकट पर यहां से घनश्याम चंद्र खरवार सांसद चुने गए। इसके बाद सियासी जड़ मजबूत हुई तो वर्ष 1998 में मायावती ने स्वयं अकबरपुर सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ी और जीती। इसके बाद 1999 और वर्ष 2004 में भी लगातार जीत दर्ज करते हुए अपनी हैट्रिक बनाई। यही नहीं 2002 के उपचुनाव में भी बसपा के टिकट पर त्रिभुवनदत्त को भी सांसद बनने का गौरव मिला।
वर्ष 2009 में राकेश पांडेय ने भी बसपा से ही चुनाव जीता, और सांसद बने। वर्ष 2014 में आयी मोदी लहर में बसपा का यह नीला दुर्ग भी सुरक्षित नही रहा। चुनाव में बसपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव भाजपा प्रत्याशी हरिओम पांडेय ने जीत लिया, इसी के साथ भाजपा का जिले में पहली बार खाता भी खुला था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह सीट फिर बसपा के ही खाते में चली गई। पूर्व सांसद राकेश पांडेय के पुत्र रितेश पांडेय सांसद बने।

कभी था सभी विधानसभाओं पर कब्जा
विधानसभा चुनाव की बात जाए तो एक समय ऐसा भी था जब 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी 5 विधानसभा सीटों पर बसपा का ही कब्जा रहा। यहां कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से धर्मराज निषाद, टांडा विधानसभा से लालजी वर्मा, जहांगीरगंज विधानसभा क्षेत्र से त्रिभुवन दत्त, अकबरपुर विधानसभा रामअचल, जलालपुर से राकेश पांडेय ने जीत हासिल की थी। सरकार गठन के बाद बसपा सुप्रीमों ने जिले के तीन विधायकों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी। रामअचल राजभर को परिवहन मंत्री, लालजी वर्मा चिकित्सा शिक्षा एवं वित्त मंत्री और धर्मराज निषाद को मत्स्य मंत्री बनाया। यह वह समय था जब बसपा कार्यकाल में प्रदेश में अंबेडकरनगर जिले की तूती बोलती थी।

फिर दरकने लगा बसपा का गढ़
हालांकि वर्ष 2012 के चुनाव में रितेश पांडेय ही एक ऐसे बसपा प्रत्याशी रहे जिन्होंने पार्टी को जलालपुर विधानसभा से जीत दिलाई। इसके अलावा बसपा ने विधानसभा के अन्य 4 सीटों को खो दिया, जो सपा के खाते में गयी थी। कुछ ऐसा ही हाल 2017 के चुनाव में भी रहा पार्टी को कटेहरी से बसपा प्रत्याशी लालजी वर्मा, अकबरपुर से रामअचल राजभर और जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी रितेश पांडेय को ही जीत मिली। महज 3 सीटों पर ही बहुजन समाज पार्टी को संतोष करना पड़ा। दो सीटें आलापुर सुरक्षित व टांडा की सीट पर भाजपा प्रत्याशियों ने अपना परचम लहराया।
हालांकि बाद में 2019 में रितेश पांडेय ने विधान सभा सदस्य पद से इस्तीफा देते हुए लोकसभा लड़ने का निर्णय लिया। विधानसभा जलालपुर में हुए उपचुनाव में यह सीट सपा की झोली में चली गयी। यहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुभाष राय विजयी हुए। मौजूदा समय में अंबेडकरनगर में बसपा के कद्दावर नेता के नाम पर सिर्फ सांसद रितेश पांडेय ही रह गए हैं।

एक-एक कर पार्टी छोड़ते चले गए खेवनहार
कुछ दिन पहले ही बसपा सांसद रितेश पांडेय के पिता पूर्व सांसद राकेश पांडेय ने बसपा को अलविदा कहते हुए सपा का दामन थाम लिया। इसी तरह करीब एक साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के काफी करीबी कहे जाने वाले पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त ने भी बसपा का साथ छोड़ दिया। मौजूदा समय में वह सपा में शामिल हैं, आलापुर सीट से विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। बसपा को सबसे तगड़ा झटका लगभग चार माह पहले तब लगा जब पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने दो मौजूदा विधायक व जिले में बसपा के कद्दावर नेता के रूप में पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री रामअचल राजभर व पूर्व मंत्री लालजी वर्मा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया।
दोनों नेता भी करीब दो माह पहले ही सपा में शामिल हो गए। मौजूदा समय में जिले में बसपा के पास बड़े नेताओं में सांसद रितेश पांडेय व पूर्व सांसद घनश्याम चंद्र खरवार के अलावा कोई नहीं है। ऐसे में बसपा का जिले में आगामी विधानसभा चुनाव में पहली जैसी वापसी कर पाना एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल बसपा ने विधानसभा चुनाव 2022 के लिए जिले के सभी पांचों सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।
अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व विधानसभा क्षेत्र प्रत्याशी रहे व पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष चंद्र प्रकाश वर्मा को मैदान में उतारा है, तो वही कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक पवन पांडेय के पुत्र व सांसद रितेश पांडेय के चचेरे भाई प्रतीक पांडेय को टिकट दिया है।

जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे स्वर्गीय शेरबहादुर सिंह के पुत्र राजेश सिंह को टिकट दिया है। वे इससे पहले भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। टांडा से बसपा नेता मनोज वर्मा को तो आलापुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से महिला प्रत्याशी केडी गौतम को मैदान में उतारा है। सभी प्रत्याशी आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी जीत दर्ज करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं।
