यूपी चुनाव 2022: भाजपा का अभेद गढ़ है लखनऊ की यह सीट, पिछले तीन दशकों से है कब्जा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग के अधिसूचना जारी करने के बाद प्रदेश में आचार संहिता लागू हो चुकी है। सभी दल चुनावी मैदान में जाने के लिए तैयार हो चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पूर्वी विधानसभा सीट से भारतीय जनता …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग के अधिसूचना जारी करने के बाद प्रदेश में आचार संहिता लागू हो चुकी है। सभी दल चुनावी मैदान में जाने के लिए तैयार हो चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पूर्वी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अभेद गढ़ क्यों माना जाता है। अगर नहीं तो आज हम आपको इसके बार में बताते है।
योगी सरकार ने बीते पांच साल में जितना काम कर दिया है, उतना आज तक किसी सरकार ने नहीं किया। शौचालय से लेकर फ्री राशन तक किस-किस का बखान करूं। यह कहना है शिव नारायण रस्तोगी का। यही नहीं अपराधियों पर नकेल एवं चुस्त कानून व्यवस्था की वजह से अपने आप को बड़ा रंगबाज समझने वाले मुख्तार, अतीक और आजम आदि को जेल की सलाखों के पीछे है। यह है योगी सरकार का इकबाल। हालांकि रिटायर्ड शिक्षक हरगोबिंद यादव उनके दावे पर यकीन नहीं करते। वह कहते हैं कि योगी ने कुछ नहीं किया। केवल समाजवादी पार्टी की सरकार में चल रही योजनाओं और कार्यों पर अपने नाम का पत्थर लगा दिया।
ठंड के इस मौसम में मंगलवार को जब सुबह दस बजे भी पारा 12 डिग्री सेल्सियस तक था, तब इंदिरा नगर सेक्टर 11 चौराहे पर पप्पू की पान की दुकान पर ऐसी तल्ख बहस लखनऊ पूर्व विधानसभा के सियासी पारे को खुद ब खुद बताती है। विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने के बाद इलाके में चुनावी चर्चा आम हो गई है। चाहे सुबह पार्क की सैर करने वाले सुनील शर्मा, राजेश सक्सेना हो अथवा अमित शुक्ला अथवा सरदार हरजिंदर सिंह ।
सभी का कहना है कि योगी सरकार में कुछ काम तो बहुत अच्छे हुए हैं लेकिन पिछली सरकार के कई कामों पर अपने नाम की पट्टिका लगाकर छवि चमकाने की कोशिश भी हुई है। सुनील शर्मा कहते हैं कि पिछली सरकारों पर अपराधों पर अंकुश लगाने में समाजवादी पार्टी फेल साबित हुई है जबकि योगीराज में अपराधियों को जेल का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं, हरजिंदर सिंह कहते हैं कि इस सरकार ने अपराधियों को भी धर्म एवं जाति के हिसाब से बांटने का काम किया है। जिससे सामाजिक तानेबाने को गहरा धचका लगा है।
सेक्टर 10 निवासी निर्मल कुमार का कहना है कि भाजपा अच्छा काम कर रही है। विधायक आशुतोष टंडन भी हमारे सुख-दुख में खड़े रहते है। जबकि अनिल यादव भाजपा को झूठों की पार्टी बताते हुये कहते है कि इस बार तो अखिलेश ही मुख्यमंत्री बनेंगे, उनका कहना है कि चुनाव जीतने के बाद से स्थानीय विधायक एक बार भी क्षेत्र में झांकनें तक नहीं आये। ठेकेदार संजीव पांडे इस बहस को दूसरी ओर ले जाते हुये कहते है कि भाजपा सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण पर रोक लगी है। जबकि घरों में काम करने वाली किरन का कहना है कि भाजपा की सरकार में ही हमंे कोरोना के समय में सभी काम छूटने के बावजूद लगातार राशन मिलता रहा।
लखनऊ पूर्व विधानसभा : वर्ष 2012 के परिसीमन के बाद पूर्व विधानसभा क्षेत्र में अलीगंज का आशिंक इलाका, डंडइया बजार, खुर्रम नगर, इंदिरा नगर कॉलोनी, गोमती नगर का कुछ क्षेत्र , विकास नगर, जानकी पुरम , निशातगंज, महानगर तथा फैजाबाद रोड का आशिंक क्षेत्र।
पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में मतादाताओं का जातीय गणित : लखनऊ पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 4,47,897 मतदाता है। यहां अधिकांश नौकरी करने वालों का निवास होने के कारण लोगों की राजनीति में दिलचस्पी कम ही है। फिर भी मुख्य तौर पर लोगों में मौजूदा विधायक के प्रति बहुत ज्यादा आक्रोश देखने को नहीं मिल रहा है। इस क्षेत्र में बहुसंख्यक हिंदू आबादी के कारण यहां भाजपा को अच्छी बढ़त मिलती दिख रही है। ब्राहमण 50000, कायस्थ मतदाता 20000, ओबीसी 60000, एससी 40000, मुस्लिम 25 से 30000, क्षत्रिय 20 से 25000 मतदाता है।
इलाके की प्रमुख समस्याएं
शहरी सीट होने के कारण यहां बिजली, पानी और सड़क की समस्या है। इसके अलावा अत्याधिक आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण जाम की समस्या भी है। घने बाजार और फुटपाथों पर पटरी दुकानदारों का कब्जा इसे बढ़ाता है। यहां के लोगों की मुख्य मांग अतिव्यस्त मुंशीपुलिया चौहारे पर फ्लाईओवर के निर्माण की है।
कलराज मिश्रा रह चुके हैं विधायक
लखनऊ पूर्व से वर्ष 2012 में भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र विधायक रहे हैं। वर्ष 1989 में यहां से जनता दल रविदास मेहरोत्रा विधायक रहे हैं। इसके अलावा भाजपा नेता भगवती प्रसाद शुक्ल 1993 से लगाताकर कई बार विधायक रहे हैं। 2017 में भाजपा के आशुतोष टंडन विधायक और प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री भी है।
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