चुनावी मुद्दा : नवाबी दौर की शिक्षण संस्थाएं उत्थान को तरस गईं
सुहेल जैदी/अमृत विचार। नवाबी दौर की शिक्षण संस्थाएं अपने उत्थान को तरस रही हैं। आजादी के बाद से अब तक जितनी भी सरकारें बनीं इन शिक्षण संस्थानों की तरक्की में बाधक बनी रहीं। इमारतों का रखरखाव भी ढंग से नहीं हो पा रहा है। प्रदेश का मशहूर शारीरिक कालेज भी उपेक्षित है। डिजिटल शिक्षा के …
सुहेल जैदी/अमृत विचार। नवाबी दौर की शिक्षण संस्थाएं अपने उत्थान को तरस रही हैं। आजादी के बाद से अब तक जितनी भी सरकारें बनीं इन शिक्षण संस्थानों की तरक्की में बाधक बनी रहीं। इमारतों का रखरखाव भी ढंग से नहीं हो पा रहा है। प्रदेश का मशहूर शारीरिक कालेज भी उपेक्षित है। डिजिटल शिक्षा के अलावा आज के दौर की आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था भी किसी स्कूल कालेज में नहीं है।
- इमारतों का रखरखाव भी नहीं किया गया, फिजिकल कालेज भी उपेक्षित
- मदरसा आलिया में तालीम हासिल कर इन्होंने किया दुनिया में नाम रोशन
- मौलाना मोहम्मद अली जौहर, डॉ. शिबली नोमानी, अब्दुल अजीज मेनन, अल्लामा फजले हक आदि
रियासत के दौर से ही उप्र में सबसे ज्यादा सरकारी स्कूल रामपुर जिले में हैं। नवाब रजा अली खां ने वर्ष 1932 में पहले खुर्शीद गर्ल्स स्कूल की स्थापना कराई। ख्वाजा गुलाम सैयादेन को रियासत का शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया। उन्होंने रामपुर में वरनाकुलर स्कूल, ऐंग्लावरनाकुलर स्कूल, मिडिल स्कूल के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में सौ स्कूल स्थापित कराए। जबकि, वर्ष 1939 में मुर्तजा स्कूल के अलावा 26 जून 1939 को शारीरिक प्रशिक्षण समिति बनी।
रामपुर में पहला फिजिकल कालेज बना। 1940 में रजा इंटर कालेज मौजूदा इमारत में स्थानांतरित हुआ। इससे पहले मदरसा आलिया ने दुनिया में रामपुर का नाम रोशन कर दिया था। मदरसा आलिया को राजकीय रजा इंटर कालेज के कमरे में समेट दिया। इसके साथ कमर लका स्कूल, स्टेट हाई स्कूल वर्तमान में हामिद इंटर कालेज, जुल्फिकार स्कूल, बाकर स्कूल, बेनजीर रोड पर हेग टीचर्स ट्रेनिंग स्कूल, राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत कई स्कूल कालेज हैं। लेकिन, इन स्कूलों में शिक्षा परंपरागत दी जा रही है। जबकि, इस दौर में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं।
आईटी समेत तमाम नए कोर्सेज की मांग बढ़ी है। लेकिन, नवाबी दौर की शिक्षण संस्थाओं में आज भी इतिहास, भूगोल, हिंदी, अंग्रेजी विषय ही पढ़ाए जा रहे हैं। शिक्षाविद् भी कहते हैं पुराने जमाने के कोर्स पढ़ाना भी जरूरी है लेकिन, नए दौर के डिजिटल विषयों की शिक्षा दिया जाना बहुत जरूरी है।
शिक्षाविद डॉ. मुमताज अर्शी का कहना है कि बदलते जमाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी नए सब्जेक्ट आए हैं। तेजी के साथ तरक्की हासिल करने के लिए जरूरी है कि वक्त के साथ कदमताल की जाए। रामपुर में कुछ प्राइवेट स्कूलों में तो नए दौर की शिक्षा दी जा रही है। लेकिन, सरकारी स्कूलों में चाल पुरानी है।
शिक्षाविद डा. रूबी महमूद खां कहते हैं कि जमाना तेजी से बदल रहा है रामपुर में तमाम सरकारी स्कूलों में अभी पुरानी शिक्षा नीति के तहत ही पढ़ाई लिखाई हो रही है। तरक्की के लिए जरूरी है कि स्कूलों में डिजिटल शिक्षा होना चाहिए। ताकि, यहां से पढ़े लिखे छात्र आईटी के क्षेत्र में नाम रोशन करें।
मदरसा आलिया संघर्ष समिति के मोहम्मद हुसैन साबरी का कहना है कि मदरसा आलिया राजकीय ओरियंटल कालेज ने पहले ऐसे नामचीन तालिबे इल्म दिए जिन्होंने रामपुर का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है। लेिकन अब यह संस्थान समय के साथ कदमताल नहीं कर पा रहा। इस अरबी फारसी यूनिवर्सिटी की इमारत पर भी कब्जा कर लिया गया है।
मौलाना मोहब्बे अली नईमी कहते हैं कि दुनिया भर में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बदलाव आ चुके हैं। छात्र-छात्राओं के लिए कंप्यूटर एजुकेशन का इंतजाम हर स्कूल कालेज में होना चाहिए। यह काम प्राइवेट स्कूलों ने शुरू कर दिया है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए जदीद तालीम देने का इंतजाम होना चाहिए।
