केंद्र और प्रदेश की सत्ता में हमेशा रही रामपुर की दखल
सुहेल जैदी/अमृत विचार। केंद्र या प्रदेश में चाहे किसी की सरकारें रहीं लेकिन रामपुर के किसी न किसी सियासतदां का अब तक बनी सरकारों में दखल जरूर रहा है। रियासत काल के बाद से जिले की राजनीति कभी हाशिए पर नहीं रही। चाहे नवाब परिवार हो या फिर इनके बाद आजम खां, मुख्तार अब्बास नकवी …
सुहेल जैदी/अमृत विचार। केंद्र या प्रदेश में चाहे किसी की सरकारें रहीं लेकिन रामपुर के किसी न किसी सियासतदां का अब तक बनी सरकारों में दखल जरूर रहा है। रियासत काल के बाद से जिले की राजनीति कभी हाशिए पर नहीं रही। चाहे नवाब परिवार हो या फिर इनके बाद आजम खां, मुख्तार अब्बास नकवी कहीं न कहीं मंत्रिमंडल में रामपुर के जनप्रितिनिधियों का स्थान बना रहा। पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के रामपुर से बेहद करीबी रिश्ते रहे। देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने रामपुर से वर्ष 1952 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता था।
नवाब खानदान का रामपुर की सियासत में लंबे समय तक दबदबा रहा है। नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां पांच बार सांसद बने तो उनकी पत्नी बेगम नूरबानो दो बार रामपुर से लोकसभा सदस्य चुनी गईं। उनके बेटे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां भी लगातार पांच बार विधायक का चुनाव जीते हैं। एक बार तो उन्होंने विधायक बनने के 11 दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह दूसरी पार्टी में शामिल हो गए और उपचुनाव में भी जीत गए। नवेद मियां पहली बार 1996 में कांग्रेस के टिकट पर बिलासपुर से चुनाव लड़कर विधायक बने थे। इसके बाद साल 2002 में हुए चुनाव में भी वह कांग्रेस के टिकट पर स्वार से विधायक बने।
लेकिन, साल 2003 में कांग्रेस छोड़ बसपा में शामिल हो गए और मायावती की सरकार में मंत्री बन गए। उसी साल बसपा की सरकार गिर गई और सपा सत्ता में आ गई। इस पर नवेद मियां सपा में शामिल हो गए। वर्ष 2007 में विधान सभा चुनाव हुए तो नवेद मियां स्वार से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए। लेकिन, तब प्रदेश में बसपा की सरकार बन गई। इस पर नवेद मियां ने विधायक चुने जाने के 11 दिन बाद ही सपा और विधायकी से इस्तीफा दे दिया, तब स्वार में उप चुनाव हुआ। इसमें वह बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और पहले से भी ज्यादा वोटों से जीते। वर्ष 2012 के चुनाव में भी नवेद मियां स्वार सीट से ही विधायक चुने गए। लेकिन, 2017 के चुनाव में हार गए। उनके मुकाबले सांसद आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम चुनाव जीत गए, किंतु कम उम्र में चुनाव लड़ने के आरोप में हाईकोर्ट ने उनकी विधायकी रद्द कर दी।
वर्ष 1998 में पहली बार केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री बने मुख्तार अब्बास नकवी : रामपुर से चुनाव जीतकर वर्ष 1952 में मौलाना अबुल कलाम आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने। वर्ष 1988 प्रदेश की कांग्रेस सरकार में निसार हुसैन मंत्री रहे। वर्ष 1998 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री बने।
आजम खां नौ बार विधायक और अब सांसद
पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां ने पहला चुनाव वर्ष 1977 में लड़ा था और वह कांग्रेस के प्रत्याशी शन्नू खां से चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 1985 में लोकदल के टिकट पर पहली बार विधायक बने और पीछे मुड़कर नहीं देखा। अलबत्ता, वर्ष 1996 में कांग्रेस के प्रत्याशी अफरोज अली खां से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2019 में हुए चुनाव में लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए और उनकी पत्नी डा. तजीन फातिमा रामपुर से शहर सपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुईं।

