बरेली: नवाबगंज से भगवत सरन, शहर से राजेश तो बहेड़ी से अताउर रहमान को मिला टिकट

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बरेली, अमृत विचार। कई दिनों के मंथन के बाद समाजवादी पार्टी ने गुरुवार शाम जिले की नौ विधानसभा सीटों में से तीन पर प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगा दी। पार्टी ने नवाबगंज से पांच बार के विधायक एवं दो बार मंत्री रहे कुर्मी समाज में मजबूत प्रभाव रखने वाले भगवत सरन गंगवार, शहर सीट …

बरेली, अमृत विचार। कई दिनों के मंथन के बाद समाजवादी पार्टी ने गुरुवार शाम जिले की नौ विधानसभा सीटों में से तीन पर प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगा दी। पार्टी ने नवाबगंज से पांच बार के विधायक एवं दो बार मंत्री रहे कुर्मी समाज में मजबूत प्रभाव रखने वाले भगवत सरन गंगवार, शहर सीट से 22 साल से लगातार पार्षद रहने वाले राजेश अग्रवाल और बहेड़ी से दो बार के विधायक रहे अताउर रहमान को टिकट दिया है। तीनों को सिंबल भी दे दिया गया।

पार्टी का सिंबल लेकर तीनों प्रत्याशी देर रात लखनऊ से बरेली पहुंच गए थे। भगवत सरन और राजेश अग्रवाल को बुधवार को लखनऊ से फोन कर लखनऊ बुलाया गया था, जबकि अताउर रहमान पहले से वहीं पर थे। देर शाम टिकट फाइनल होने की बात मालूम होने पर तीन क्षेत्रों के प्रत्याशियों के समर्थकों ने जमकर खुशी मनायी। नेताओं के कार्यालयों में मिठाइयां बांटी गईं। समर्थकों ने प्रत्याशियों को जिताने के लिए जीजान से जुटने का संकल्प भी लिया। हालांकि, बरेली कैंट, बिथरी चैनपुर, मीरगंज, आंवला, फरीदपुर, भोजीपुरा सीट पर टिकट फाइनल नहीं हुए हैं लेकिन कई चर्चित नामों की चर्चा है।

कुर्मी नेता के रूप में पीलीभीत तक प्रभाव रखते हैं भगवत सरन
तीन बार भाजपा और दो बार सपा से विधायक रहे भगवत सरन गंगवार की कुर्मी समाज में मजबूत पकड़ है। उनका प्रभाव बरेली तक ही नहीं, बल्कि पीलीभीत तक माना जाता है। राजनीति में लंबा अनुभव है और भगवत सरन गंगवार ने ही केसर सिंह गंगवार को राजनीतिक गुर सिखाए थे। भाजपा ने दो बार हार का मुंह देख चुके डा. एमपी आर्य को इस बार टिकट दिया है। इसलिए भगवत सरन को मैदान में उतारकर सपा नवाबगंज सीट पर जीत सुनिश्चित मानकर चल रही है।

उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रही है। राजनीति में लगातार आगे बढ़ते रहने से उनकी राह में जब बाधाएं आने लगीं तो उन्होंने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली थी। सपा के टिकट पर भी वे इसी क्षेत्र से दो बार विधायक बनकर सपा सरकार में मंत्री भी रहे। भगवत सरन भी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं। वे क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहकर जनसंपर्क कर रहे हैं।

22 साल की मेहनत और स्वच्छ छवि ने राजेश अग्रवाल को दिलाया टिकट
नगर निगम में पार्षद राजेश अग्रवाल ने अपने काम के जरिए ही पार्टी में नाम कमाया है। जनता का स्नेह उन्हें 22 साल से लगातार मिल रहा है। क्षेत्र में काम करने का जुनून देखकर पार्टी ने उन्हें नगर निगम में समाजवादी पार्टी के पार्षदों का नेता बनाया। उनकी पत्नी रागिनी भी पूर्व पार्षद हैं। राजेश की लोकप्रियता का आलम है कि उनके अलावा क्षेत्र से अभी तक कोई भी पार्षदी नहीं जीत पाया है। राजेश को वैश्य, अग्रवाल समेत हर वर्ग के लोगों का साथ सालों से मिलता आ रहा है।

समाजवादी पार्टी ने कई दावेदारों के बीच उनका नाम शहर विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए तय किया है। राजेश अग्रवाल पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने टिकट के लिए आवेदन करने के बाद लखनऊ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाए और पार्टी ने कार्यकर्ता का सम्मान करते हुए उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है।

दो बार विधायक रह चुके हैं अताउर रहमान
वर्ष 1996 से राजनीति में सक्रिय अताउर रहमान दो बार बहेड़ी सीट से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2002 और 2012 में दो बार विधायक रहे। 2012 में भाजपा के छत्रपाल सिंह से 18 वोटों से जीते थे। इस बार बहेड़ी से मात्र दो दावेदार थे। पार्टी ने उन्हें जीत का हकदार मानते हुए पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया। अताउर रहमान भी पार्टी का सिंबल लेकर लखनऊ से बरेली के लिए रवाना हो चुके हैं। नसीम अहमद भी सपा से टिकट पाने के लिए लगे थे लेकिन पार्टी ने अताउर रहमान पर दांव खेला है। इस सीट पर भाजपा ने सिटिंग विधायक छत्रपाल गंगवार को मैदान में उतारा है।

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