गोरखपुर सदर सीट: सीएम योगी को कांटे की टक्कर देंगी शुभावती, यह है वजह…
गोरखपुर। गोरखपुर की सदर विधानसभा सीट पर सीएम योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया। पिछले तीस साल से यह सीट भाजपा के पास ही है। लेकिन भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष स्व. उपेंद्र दत्त शुक्ल की पत्नी शुभावती शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा की राह मुश्किल कर दी है। …
गोरखपुर। गोरखपुर की सदर विधानसभा सीट पर सीएम योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया। पिछले तीस साल से यह सीट भाजपा के पास ही है। लेकिन भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष स्व. उपेंद्र दत्त शुक्ल की पत्नी शुभावती शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा की राह मुश्किल कर दी है।
शुभावती के मैदान में आने से ब्राह्मण मतदाताओं के ध्रुवीकरण की उम्मीद है। ऐसे में सपा की कोशिश जय परशुराम-जय श्री कृष्ण के नारे के साथ यहां भाजपा को कड़ी चुनौती दी जाए।
गोरखपुर सदर सीट में हैं कुल 4.50 लाख मतदाता
गोरखपुर सदर सीट पर करीब 4.50 लाख वोटर हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या कायस्थ मतदाताओं की है। यहां कायस्थ 95 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, मुस्लिम 50 हजार, क्षत्रिय 25 हजार, वैश्य 45 हजार, निषाद 25 हजार, यादव 25 हजार, दलित 20 हजार इसके अलावा पंजाबी, सिंधी, बंगाली और सैनी कुल मिलाकर करीब 30 हजार वोटर हैं। ऐसे में यदि ब्राह्मण , मुस्लिम, यादव और कायस्थ मतदाताओं का समर्थन हासिल करने में शुभावती शुक्ल सफल रहती हैं तो भाजपा का लिए अपनो किला बचाना आसान नहीं होगा।
वैसे कौड़ीराम विधानसभा सीट पर वर्ष 2005 में हुए उपचुनाव में स्व. उपेन्द्र शुक्ल भाजपा के खिलाफ बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े। हालांकि वह खुद तो नहीं जीते लेकिन भाजपा प्रत्याशी भी चुनाव नहीं जीत सक। पार्टी को उनकी ताकत का एहसास हो गया और उनको वर्ष 2013 में वह भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाये गये । 2014 में संगठनात्मक चुनावों में वह फिर क्षेत्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
विधवा ब्राह्मणी और सीएम योगी में होगा कड़ा मुकाबला…
हालांकि पार्टी ने वर्ष 2017 में फिर प्रत्याशी नहीं बनाया। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री अजय सिंह विष्ट उपाख्य योगी आदित्यनाथ जी के सांसद पद से इस्तीफे के बाद लोकसभा उपचुनाव में पार्टी ने उनको प्रत्याशी बनाया लेकिन सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद से वह 21,000 वोटों से हार गए।
ऐसे में एक विधवा ब्राह्मणी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मुकाबला कड़ा होगा। वैसे भी पूर्वांचल की अधिकतर सीटों पर हाता (पंडित हरिशंकर तिवारी, पंडित विनय शंकर तिवारी) का असर अब दिखने लगा है और एक खास सामाजिक समूह में कतारबद्धता आयी है। ऐसे में हाता का समर्थन भी भीतरखाने संभवता स्वजातीय प्रत्याशी को मिल सकता है।
ये भी पढे़ं; पिछड़ों के हक के लिये भाजपा में जुबान नहीं खोल सकते स्वतंत्र देव: राजभर
