बरेली: सुब्हानी मियां के दामाद लड़ेंगे ओवैसी की पार्टी से चुनाव

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बरेली,अमृत विचार। सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के मरकज दरगाह आला हजरत निस्बत रखने वाले दुनिया भर में हैं। भारी तादात में लोगों की अकीदत के चलते इस स्थान को एक ऐसा केंद्र माना जाता है, जहां से न सिर्फ इस्लामी मसाइल बल्कि मुसलमानों का सियासी रुख भी तय होता है। बीते दिनों खानदाने आला हजरत से …

बरेली,अमृत विचार। सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के मरकज दरगाह आला हजरत निस्बत रखने वाले दुनिया भर में हैं। भारी तादात में लोगों की अकीदत के चलते इस स्थान को एक ऐसा केंद्र माना जाता है, जहां से न सिर्फ इस्लामी मसाइल बल्कि मुसलमानों का सियासी रुख भी तय होता है। बीते दिनों खानदाने आला हजरत से दो राजनीतिक सुर साफ-साफ सुनाई दिए।

आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा कांग्रेस के पाले में आए तो रजा एक्शन कमेटी के नायब सदर अदनान रजा ने सपा को समर्थन देने का ऐलान किया। माना जा रहा था कि खानदान के कुछ और लोग सियासत का एक नया ट्रैक पकड़ सकते हैं, जो अब होता दिखाई दे रहा है।

दरअसल दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां के दामाद सैयद आसिफ मियां ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लेमीन से नामांकन दाखिल किया है। उन्होनें खटीमा सीट से पर्चा दाखिल किया।

हालांकि दरगाह से जुड़े सूत्र यह बताते हैं कि आसिफ मियां का यह निजी फैसला है। वहीं दरगाह का भी इस पर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सैयद आसिफ मियां सुब्हानी मियां के दामाद हैं तो लोग उनके इस निजी फैसले को भी सीधे तौर से दरगाह से जोड़कर ही देख रहे हैं।

सुब्हानी मियां के दामाद आसिफ मियां को उर्स-ए-रजवी के दौरान उर्स का प्रभारी भी बनाया गया था। पूरे उर्स के दौरान सारी व्यवस्थाएं सीधे तौर पर सैयद आसिफ मियां ने ही संभालीं थीं। सैयद आसिफ मियां ने फोन पर बातचीत के दौरान अमृत विचार को बताया कि वह असद उद्दीन ओवैसी की विचारधारा से काफी प्रभावित हैं, यही सोचकर उनकी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं।

एआईएमआईएम से चुनाव लड़ने से पहले दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां से सलाह मश्विरा करने के सवाल पर वह कहते हैं कि वह अपने फैसले खुद ले सकते हैं।
हालांकि दरगाह से जुड़े लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां आसिफ मियां के इस फैसले से खुश नहीं हैं।

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