मुरादाबाद : टिकट कटा तो बदला पाला, लगा स्वार्थी-अवसरवादी का ठप्पा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

मुरादाबाद,अमृत विचार। राजनीति का अजीब चलन है। वर्षों का झंडाबरदार चुनावी समर में योद्धा के लायक नहीं समझा जाता, उसे परहेज कर अपमान का तीर चलाने वाले विरोधी को अजीज व जिताऊ मान दल के चोले में रंग दिया जाता है। इससे झंडाबरदार का दिल टूटना लाजमी है, मगर सियासत के निराले रंग में किसी …

मुरादाबाद,अमृत विचार। राजनीति का अजीब चलन है। वर्षों का झंडाबरदार चुनावी समर में योद्धा के लायक नहीं समझा जाता, उसे परहेज कर अपमान का तीर चलाने वाले विरोधी को अजीज व जिताऊ मान दल के चोले में रंग दिया जाता है। इससे झंडाबरदार का दिल टूटना लाजमी है, मगर सियासत के निराले रंग में किसी दल का गद्दार दूसरे के लिए वफादार बन ही जाता है।

  • वाह री राजनीति तेरी चाल… वर्षों का झंडाबरदार, चुनावी समर में योद्धा के लायक नहीं समझा जाता

यह कटु मगर सत्य है। किसी एक नहीं, यह हर दल की कहानी है। वर्षों तक झंडाबरदारी करने वाले लोग, जो पार्टी के टिकट की आस में दिन रात एक कर सर्दी, गर्मी, बरसात की परवाह किए बगैर सड़क व पगडंडी पर चलते हैं, सियासी खांचे में अचानक अनफिट हो जाते हैं। बरसों किसी दल के लिए वफादारी कर रस्में और कसमें निभाने वाले का यदि टिकट कटा या नये चेहरे को अवसर दिए जाने से उसकी आस टूटी तो वह एक झटके में पलटी मार दूसरे दल का हो जाता है। ऐसा होते ही उसकी वर्षों की वफादारी को गद्दारी का नाम देकर उस पर स्वार्थी, अवसरवादी होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। बात चाहे मुरादाबाद जिले या मंडल की हो या फिर पूरे प्रदेश की।

हर ओर चुनाव में यह ही रंग और फितरत हावी है। भाजपा से सपा में गए नेता को भगवा वालों ने नाकाबिल और अवसरवादी का खिताब दिया तो सपा-बसपा से भाजपा में आने वालों को भरोसेमंद बताया। यह ही हाल सपा व बसपा में भी दूसरे दलों से आने वालों पर लागू होता है। दूसरे दल से जो आया उसे गले लगाया जाता है और अपने वाला यदि दूसरे दल में जाता है तो उसे दगाबाज करार दिया जाता है। ऐसा तमगा किसी एक दो को नहीं फेहरिस्त में बहुतेरों के नाम है। किसी ने खुद का टिकट कटने पर पाला बदला तो दूसरे का हक मार नये दल के रंग में रंग गए। हर दल में बगावत टिकट कटने की तपिश है, तो नये चेहरों को अवसर न मिलने की दबी चिंगारी भी आग का रूप लेने को बेताब है।

जनपद में इन्होंने बदला पाला
जिले में कल तक खांटी सपाई रहे सपा के देहात विधायक हाजी इकराम कुरैशी का टिकट काट जब किसी और पर पार्टी ने भरोसा जताया तो वह भी झट पाला बदल हाथ के साथ हो लिए। अब सपा के लोग उन्हें दगाबाज कहते फिर रहे हैं। हालांकि इनके पाला बदलने से देहात सीट से कांग्रेस का टिकट पाए नदीम अचानक अर्श से फर्श पर आ गए। कुंदरकी से सपा विधायक हाजी रिजवान ने टिकट कटने पर पाला बदल हाथी की सवारी कर ली। उन्हें हाथी का साथ मिला और वह मैदान में ताल ठोंक कर सपा को ही मिटाने का दम भर रहे हैं।

दलबदल से नई पहचान
नेताओं के दल बदलते ही उनकी पहचान भी बदल जाती है। वह नई पहचान के साथ जीने-मरने की कसमें खाते फिरने लगते हैं। दल बदलने में दलों के दिग्गज भी शुमार हैं। जैसे ही दल बदला उनकी पहचान भी नये दल के रंग में रंग जाती है।

रामपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने छोड़ा था हाथ का साथ
मुरादाबाद मंडल के रामपुर जिले में कांग्रेस महासचिव व चमरौआ के पूर्व विधायक अली यूसुफ अली को पार्टी ने चमरौआ सीट से इस बार विधायक का प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन, अगले ही दिन उन्होंने हाथ का साथ छोड़कर सपा की साइकिल की सवारी कर ली। हालांकि वह 2012 में इस सीट से बसपा से विधायक चुने गए थे।

 

संबंधित समाचार