लखनऊ: कोरोना के बाद अब आचार संहिता ने लगाया कारोबार पर ब्रेक, व्यापारी परेशान…

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बाद अब आचार सहिंता ने कारोबार पर ब्रेक लगा दिया है। आचार सहिंता लागू होने के बाद से लोग मोटी धनराशि लेकर चलने से कतरा रहे हैं। इसका खामियाजा रियल इस्टेट कारोबारियों के साथ ही सराफा व्यापारियों को भी भुगतना पड़ रहा है। कोरोना के कारण प्रभावित हुआ था वाहन कारोबार …

लखनऊ। कोरोना संक्रमण के बाद अब आचार सहिंता ने कारोबार पर ब्रेक लगा दिया है। आचार सहिंता लागू होने के बाद से लोग मोटी धनराशि लेकर चलने से कतरा रहे हैं। इसका खामियाजा रियल इस्टेट कारोबारियों के साथ ही सराफा व्यापारियों को भी भुगतना पड़ रहा है।

कोरोना के कारण प्रभावित हुआ था वाहन कारोबार

वाहन कारोबार भी इससे अछूता नहीं है। कारोबारियों के अनुसार पिछले दो वर्ष तो कोरोना की भेंट चढ़ गए। इस वित्तीय वर्ष में भी फरवरी महीने में ही उम्मीदें बची थी, लेकिन अब आचार सहिंता के चलते खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। रियल इस्टेट, वाहन और सराफा कारोबारी की माने तो इस वित्तीय वर्ष में चुनाव के चलते तकरीबन 80 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।

धान सभा चुनाव के बाद ही रफ्तार पकड़ेगा रियल इस्टेट कारोबार

रियल इस्टेट कारोबारियों के अनुसार पिछले दो वर्षों के बाद इस वर्ष जमीन और फ्लैट्स के खरीदने और बेचने की शुरुआत हुई थी। दीपावली तक इस वर्ष कारोबार बेहतर रहा। उसके बाद अच्छे दिनों के इंतजार में कारोबार में गिरावट आनी शुरू हो गई। बीते 14 जनवरी से बेहतर कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन इसके पहले आचार सहिंता लग गई।

फिर तो प्रापर्टी डीलर के ऑफिसों में एक बार फिर सन्नाटा बिखर गया। निबंधन कार्यालय में भी इक्का-दुक्का ही रजिस्ट्रियां हो रही हैं। रियल इस्टेट कारोबारियों के अुनसार फरवरी मार्च में ही इस बार अकेले लखनऊ में 50 करोड़ से ऊपर के कारोबार की उम्मीद थी। अब तो विधान सभा चुनाव के बाद ही रियल इस्टेट कारोबार में रफ्तार देखने को मिलेगी।

अधिकांश लोग निवेश के लिए प्रापर्टी को प्राथमिकता देते हैं। कोरोना काल के बाद पिछले वर्ष दीपावली से रियल इस्टेट कारोबार में हलचल देखने को मिली थी। लेकिन आचार संहिता के चले इस पर एक बार फिर ब्रेक लग गए हैं।

सौरभ चुग, रियल इस्टेट कारोबारी

आचार सहिंता ने फीकी की सोने-चांदी की चमक

सहालग का सीजन होने के बाद भी सराफा बाजारों में रौनक देखने को नहीं मिल रही है। सराफा कारोबारियों के अनुसार नोट बंदी के समय से सराफा कारोबार को जो झटका लगा है, उससे अभी तक व्यवसाई उबर नहीं सके हैं। नोट बंदी, जीएसटी, कोराना संक्रमण के बाद सराफा व्यापारियों इस बार जनवरी और फरवरी में बेहतर कारोबार होने की उम्मीद नजर आ रही थी। लेकिन आचार संहिता ने सोना-चांदी खरीदने का मन बना रहे लोगों की कमर तोड़ कर रख दी।

निवेशक ही नहीं बल्कि जिनके घरों में शादियां है, वे भी औपचारिकताएं पूरी करने भर की खरीदारी कर रहे हैं। इस सहालग में तकरीबन दस करोड़ का सराफा कारोबार प्रभावित हुआ है। अब सराफा कारोबारियों को मई जून में पड़ने वाली अगली सहालग तक इंतजार करना पड़ेगा।

सराफा कारोबारियों को तो पिछले चार-पांच साल से खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। सहालग का यह सीजन तो इस बार आचार सहिंता की भेंट चढ़ गया। अब अगले सहालग सीजन का ही व्यवसाइयों को इंतजार रहेगा।

प्रदीप कुमार अग्रवाल, वरिष्ठ महामंत्री, लखनऊ सराफा एसोसएिशन

खरीदारों को लुभाने के लिए वाहन कंपनियों के प्रतिनिधि कर रहे खरीदारों को काल

आचार संहिता लागू होने के बाद से वाहन कारोबार भी प्रभावित हो गया है। वाहनों के शोरूम में मौजूद प्रतिनिधियों के अनुसार वाहनों की आपूर्ति पहले ही प्रभावित चल रही है। लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद लोगों ने वाहनों की बुकिंग कराना शुरू कर दी थी। आचार संहिता लागू होने के बाद अब लोग शोरूम में वाहनों की जानकारी के लिए कम ही पहुंच रहे हैं।

आचार संहिता की गाइड लाइन के चलते लोग अब जरूरी कार्यों के लिए कैश लेकर चल रहे हैं। आलम यह है कि वाहन शोरूम के प्रतिनिधि लोगों को मोबाइल पर कॉल कर वाहनों में मिलने वाली छूट और फायदे गिना रहे हैं। बुकिंग में आई कमी से इस बार जनवरी-फरवरी में तकरीबन 20 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है।

वाहनों के रजिस्ट्रेशन की संख्या कम हो गई है। बाजार में वाहनों की आपूर्ति पहले ही प्रभावित है। वाहनों के शोरूम के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में यह बात सामने आई है कि इस समय लोग वाहनों की बुकिंग भी कम करा रहे हैं।

एके द्विवेदी, एआरटीओ प्रशासन लखनऊ।

ये भी पढ़ें: हल्द्वानी: विजय बहुगुणा के बिगड़े बोल, कहा- हरीश रावत की राजनीतिक मौत का कुआं बनेगा लालकुआं

संबंधित समाचार