अयोध्या: बाहुबलियों ने चुनाव में हमेशा मारा मैदान, रहे जेल के अंदर लेकिन बने ‘सिकंदर’
अयोध्या। इतिहास गवाह है। जेल से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी बामुश्किल ही हारे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अमूमन मामलों में उन्होंने विजय ही हासिल की है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी पार्टियों ने जेल में बंद कद्दावर नेताओं को टिकट दिया है। हालांकि जीत-हार तो 10 मार्च को तय होगी, लेकिन पुराने पन्ने …
अयोध्या। इतिहास गवाह है। जेल से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी बामुश्किल ही हारे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अमूमन मामलों में उन्होंने विजय ही हासिल की है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी पार्टियों ने जेल में बंद कद्दावर नेताओं को टिकट दिया है। हालांकि जीत-हार तो 10 मार्च को तय होगी, लेकिन पुराने पन्ने उलटकर देखेंगे तो भविष्य की पूरी तस्वीर साफ होती नजर आएगी। राजनीतिक पंडित इसे मुकद्दर और भावनाओं का खेल बताते हैं।
आज से महज 10 दिन बाद से लोकतंत्र का पर्व शुरू हो रहा है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा करने का काम जारी है। पार्टी नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर अपराधियों को टिकट देने का आरोप-प्रत्यारोप भी चल रहा है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा में दो नाम रहे, जिसमें समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार, पूर्व मंत्री आजम खाँ व निर्दलीय उम्मीदवार और बाहुबली मुख्तार अंसारी। ये दोनों ही धुरंधर जेल की सलाखों के पीछे हैं।
सियासी पंडितों का मानना है कि जेल में बंद रहने वाला प्रत्याशी भावनाओं में बाजी मार जाता है। अमूमन देखा जाता है कि जेल काट रहे प्रत्याशियों की पत्नी, भाई, बेटा व अन्य सगे संबंधी सेंटीमेंटल वोट मांगते हैं और जनता भी भावुक होकर प्रत्याशियों को जिताने का काम करती है। धुरंधरों का राजनीतिक इतिहास भी इस बात की गवाही देता है।
हरिशंकर तिवारी ने पहली बार जेल से जीता था चुनाव
प्रदेश के राजनेताओं का जेल से पुराना नाता रहा है। बात सबसे पहले बाहुबली हरिशंकर तिवारी की करते हैं। हरिशंकर ने 1985 में जेल में रहते हुए ही गोरखपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। ये पहले शख्स थे जिसने जेल से चुनाव जीता था। इसके बाद तो मानो जैसे जेल से चुनाव जीतने का चलन ही बढ़ गया। राजनीति के राजा रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया ने कुंडा में 2002 का चुनाव जेल से लड़कर जीता था।
फिलहाल उन्होंने अब अपनी पार्टी जनसत्ता दल बना ली है। मऊ सदर सीट से मुख्तार अंसारी भी जेल में रहकर चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। यही हाल रायबरेली सीट से अखिलेश सिंह का भी रहा। नौतनवा विधानसभा से अमन मणि त्रिपाठी ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 2017 में जेल से चुनाव जीता था।
इस बार भी इन पर रहेगी नजर
मऊ विधानसभा सीट से मुख्तार अंसारी, रामपुर से सपा प्रत्याशी आजम खां, बुलंदशहर के स्याना विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार योगेश राज, भदोही की ज्ञानपुर सीट से निषाद पार्टी से विजय मिश्रा भी जेल से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। कैराना से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन भी जेल से ताल ठोक सकते हैं।
अपवाद रहा अतीक अहमद का मामला
प्रयागराज के अतीक अहमद। 1979 में पहली बार हत्या का मामला दर्ज हुआ था। उसके बाद 1989 में अतीक अहमद ने राजनीति का रुख किया और विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। 2004 में फूलपुर लोकसभा से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतकर संसद में कदम रखा। इसके बाद वो लगातार जीतते रहे, लेकिन जब भी अतीक ने जेल से चुनाव लड़ा उन्हें हार मिली।
2009 में अपना दल के टिकट पर जेल में रहते प्रतापगढ़ सीट से अतीक ने लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार झेलनी पड़ी। फिर 2012 में अपना दल के ही टिकट पर जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा, बीच में अतीक को पैरोल भी मिली, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई। 2018 में फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो अतीक अहमद देवरिया जेल में बंद होते हुए भी चुनाव में कूद गए और हार का सामना करना पड़ा। अटकलें हैं कि वह अपनी बेगम को ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़ाने जा रहा है।
गोसाईगंज विधानसभा सीट: तब अभय थे जेल में, आज खब्बू हैं अंदर
प्रदेश में जब भी बाहुबलियों का नाम आता है तो गोसाईगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी से विधायक रहे अभय सिंह और भाजपा विधायक रहे इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू उसमें शुमार रहते हैं। गोसाईगंज में 2012 के चुनाव को अभय सिंह ने जेल से रहकर ही चुनाव जीता था। इस दौरान वह रिकॉर्ड मतों से जीते थे।
अभय को कुल 1,22,235 वोट मिले थे। पहली बार विधान सभा पहुंचे थे। एक इंटरव्यू के दौरान बकौल अभय वह चुनाव के समय जेल में बंद थे। उनके परिवार को परेशान किया जा रहा था। जनता ने इसे अपनी लड़ाई मान लिया और भारी मतों से जिता ढिया। उस दौरान उनकी पत्नी ने जनता के बीच जाकर अपने सुहाग के लिए वोट मांगा था।
तब इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू बसपा से थे और अभय सिंह से लगभग 60 हजार वोटों से हार गए थे। 2017 में खब्बू भाजपा से चुनाव लड़े और अभय सिंह को लगभग 11 हजार वोटों से हरा दिया था। अब एक बार फिर से बाजी पलटी है। खब्बू जेल में बंद हैं और उनकी पत्नी आरती तिवारी को भाजपा ने गोसाईगंज सीट से सपा के पूर्व विधायक अभय सिंह के सामने उतारा है।
आरती के सामने भी सुहाग की सियासत की उम्र बढ़ाने का जिम्मा है। आरती कहती हैं कि उन्हें गोसाईगंज की जनता इस बार प्यार जरूर देगी। सहानुभूति भी मेरे साथ है। हालांकि देश की राजनीति और मौसम कब बदल जाये। इसका ठिकाना नहीं रहता।
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