विधानसभा चुनाव 2022 : सियासी दांव पर मंत्री, पूर्व मंत्री और सांसद की प्रतिष्ठा

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विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव की जंग में मंडल में कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसमें कई मंत्री, पूर्व मंत्री और सांसद के लिए यह चुनाव नाक और अस्तित्व की लड़ाई है। दिग्गजों में रामपुर के सपा नेता सांसद व तीन बार के पूर्व मंत्री आजम खान हैं तो वर्तमान भाजपा सरकार …

विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव की जंग में मंडल में कई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसमें कई मंत्री, पूर्व मंत्री और सांसद के लिए यह चुनाव नाक और अस्तित्व की लड़ाई है। दिग्गजों में रामपुर के सपा नेता सांसद व तीन बार के पूर्व मंत्री आजम खान हैं तो वर्तमान भाजपा सरकार के दो राज्यमंत्रियों के लिए भी यह चुनाव खासा महत्व का है।

बात शुरू करें मंडल की राजनीति के केंद्र रामपुर जिले से तो यह समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। यहां कई दशक से सपा का एकछत्र वर्चस्व है। जिले की पांच विधानसभा सीटों स्वार, चमरौआ, बिलासपुर, रामपुर और मिलक में से 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने तीन सीट पर जीत दर्ज कर परचम लहराया था। दो सीटों पर कमल खिला था। रामपुर विधानसभा सीट से सपा के कद्दावर नेता आजम खान लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वह रामपुर से सपा के सांसद हैं। इसके चलते दोनों दल चुनाव में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। सपा ने यहां खुद आजम खान को चुनावी दंगल में उतारा है।

सपा सरकार में वह तीन बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। फिलहाल सीतापुर जेल में बंद आजम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में भाजपा भी इस सीट पर हर दांव खेल रही है। जिले की स्वार-टांडा सीट से आजम के पुत्र अब्दुल्ला आजम एक बार फिर मैदान में हैं। 2017 का चुनाव जीतकर वह विधायक बने थे। लेकिन, कम उम्र को लेकर उनके प्रतिद्वंदी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने उनका निर्वाचन रद कर दिया था। एक बार फिर वह स्वार सीट से मैदान में हैं। वहीं सपा से चमरौआ से लड़ रहे नसीर अहमद खां, आजम खान के बेहद करीबी नेता हैं।

2017 में वह सपा से जीते थे। चमरौआ से वह इस बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। आजम के एक और करीबी पूर्व विधायक विजय सिंह मिलक विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर मैदान में हैं। इन सीटों पर आजम खान की प्रतिष्ठा हर चुनाव में जुड़ी रहती है। बिलासपुर सीट से अमरजीत सिंह पहली बार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाएंगे। इस सीट पर भाजपा से वर्तमान सरकार में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख फिर दम दिखा रहे हैं। उनके बहाने भाजपा की इज्जत भी दांव पर है।

सम्भल में मंत्री गुलाबो देवी का भाजपा में ही हो चुका है विरोध : जिले में देखें तो सम्भल विधानसभा में भाजपा, सपा के अलावा बसपा और कांग्रेस भी दमखम दिखा रहे हैं। इस जिले के चंदौसी से भाजपा सरकार में सामाजिक न्याय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री गुलाबो देवी फिर चुनावी समर में हैं। हालांकि उनकी प्रत्याशिता का भाजपा में ही खुलकर विरोध भी हुआ है। 66 वर्षीया गुलाबो देवी ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।

हर सीट से जुड़ी पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी की प्रतिष्ठा : मंडल मुख्यालय मुरादाबाद जिले में प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी चुनावी मैदान में नहीं हैं, क्योंकि वह विधान परिषद के सदस्य हैं। लेकिन, हर सीट में उनकी अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिष्ठा जुड़ी है।

नए चेहरों का भाग्य भी लिखेगा इस बार का चुनाव
विधानसभा का वर्तमान चुनाव जहां कई दिग्गजों की तकदीर का फैसला करेगा, वहीं कई नये चेहरों को राजनीति में स्थापित करने का सवब भी बनेगा। 2017 के चुनाव में मंडल में भाजपा व सपा के बीच कांटे की टक्कर में 27 में से 14 सीट भाजपा और 13 सीट सपा के खाते में रही। बाद में स्वार से अब्दुल्ला आजम का चुनाव रद होने के चलते आंकड़ा 14-12 पर रहा। इस बार दोनों दल जीत के आंकड़े को बढ़ाकर सीटों की संख्या का गणित अपने पाले में डालने के लिए रह पैंतरा व दांव चल रहे हैं।

कांठ में कमाल अख्तर के उतरने से रोचक हुई लड़ाई
जिले में कांठ विधानसभा से सपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे कमाल अख्तर इस बार मैदान में हैं। मूल रूप से अमरोहा के रहने वाले कमाल अख्तर के कांठ से चुनावी ताल ठोंकने से यहां की लड़ाई रोचक हो गई है। इस सीट पर भाजपा के वर्तमान विधायक राजेश कुमार चुन्नू एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। मुरादाबाद शहर सीट पर भाजपा के वर्तमान विधायक रितेश कुमार गुप्ता दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं, जबकि देहात सीट पर भाजपा के केके मिश्र, सपा से कांग्रेस में आए विधायक हाजी इकराम कुरैशी ताल ठोके हैं।

 

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