रामपुर में डटे धुरंधर, पांचों सीटों पर कांटे का संघर्ष

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की पांचों सीटों पर एक से बढ़कर एक धुरंधर मैदान में डटे हैं। कांटे का संघर्ष हो रहा है। किसी की ओर इकतरफा लहर नहीं है। सबको संशय है कि आखिर कौन जीतेगा। इन धुरंधरों में सपा के कद्दावर नेता आजम खां जेल में बंद हैं, जोकि रामपुर शहर से चुनाव …

अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। जिले की पांचों सीटों पर एक से बढ़कर एक धुरंधर मैदान में डटे हैं। कांटे का संघर्ष हो रहा है। किसी की ओर इकतरफा लहर नहीं है। सबको संशय है कि आखिर कौन जीतेगा। इन धुरंधरों में सपा के कद्दावर नेता आजम खां जेल में बंद हैं, जोकि रामपुर शहर से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला 16 जनवरी को जेल से जमानत पर आए हैं और स्वार-टांडा से मैदान में उतरे हैं। वह अपने अलावा पिता आजम के चुनाव की कमान भी संभाले हुए हैं।

रामपुर रियासत के वंशज नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर शहर सीट पर आजम खां को चुनौती दे रहे हैं तो उनके बेटे नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) में शामिल अपना दल एस से स्वार-टांडा सीट से मैदान में उतरे हैं और अब्दुल्ला आजम को चुनौती दे रहे हैं। वहीं आजम खां को विभिन्न मामलों में जेल भिजवाने वाले भाजपा नेता आकाश सक्सेना भी आजम खां के सामने मैदान में डटे हैं।

बिलासपुर सीट भी वीआईपी है। यहां से प्रदेश सरकार में मंत्री बलदेव औलख भाजपा से मैदान में हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजय कपूर और सपा के सरदार अमरजीत सिंह भी चुनौती दे रहे हैं। चमरौआ विधान सभा सीट पर भी भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है तो मिलक-शाहबाद सुरक्षित सीट पर भी भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हो सकती है।

आजम खां की गैर मौजूदगी में हो रहा चुनाव
सपा नेता आजम खां सीतापुर जेल में बंद हैं। उन पर बेटे के फर्जी जन्म प्रमाण, पैनकार्ड, पासपोर्ट के अलावा तमाम केस दर्ज हैं। कुछ मामलों में जमानत हो चुकी है, कुछ में इसकी प्रक्रिया चल रही है। वह जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। आजम खां के विरोधी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां कांग्रेस से मैदान में हैं और चुनौती दे रहे हैं। आजम खां पर मुकदमे दर्ज कराकर जेल भिजवाने वाले आकाश सक्सेना भी भाजपा से उनके मुकाबले खड़े हैं। ऐसे में आजम की गैर मौजूदगी को उनकी कमजोरी भी बताया जा रहा है। वहीं कुछ लोग जेल में होने से आजम खां को सहानुभूति मिलने की बात भी कह रहे हैं। चौथे बसपा से सदाकत हुसैन मलिक मैदान में हैं और बसपा वोट बैंक के सहारे संघर्ष को जटिल बनाने में जुटे हैं।

चमरौआ और मिलक-शाहबाद में जातिगत समीरकरण हावी
चमरौआ सीट पर सपा के मौजूदा विधायक नसीर खां एक बार फिर मैदान में हैं। तो बसपा से पूर्व मंत्री निसार हुसैन के पुत्र जिला पंचायत सदस्य अब्दुल मुस्तफा हुसैन मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस से अली यूसुफ अली मैदान में उतरे हैं। पहले यूसुफ सपा में शामिल हो गए थे। लेकिन सपा से धोखा मिलने के बाद फिर कांग्रेस में लौट आए हैं तो भाजपा से मोहन कुमार लोधी मैदान में डटे हैं। मुस्लिम तुर्क बाहुल्य सीट पर कड़ा संघर्ष है। क्योंकि तीन बड़े दलों से मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं भाजपा से मोहन कुमार लोधी हैं। लोधी राजपूत वोटों की संख्या भी इस क्षेत्र में ठीक है। चारों दलों के बीच कांटे के संघर्ष होने जा रहा है। वहीं मिलक-शाहबाद सीट सुरक्षित है। यहां से भाजपा ने मौजूदा विधायक राजबाला को मैदान में उतारा है। सपा ने पूर्व विधायक विजय सिंह पर दांव खेला है। बसपा ने सुरेंद्र सागर को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से कुमार एकलव्य वाल्मीकि मैदान में हैं। इस सीट पर भी जातीय समीकरण हावी हैं। चारों प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला हो रहा है।

बिलासपुर में मंत्री बलदेव को चुनौती
बिलासपुर विधानसभा सीट पर मंत्री बलदेव औलख भाजपा से मैदान में हैं। उन्हें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजय कपूर के साथ ही सपा के सरदार अमरजीत सिंह ने कड़ी चुनौती दे रखी है। बसपा के रामौतार कश्यप भी यहां पार्टी के अपने वोट बैंक के सहारे संघर्ष को चुनौती पूर्ण बना रहे हैं। बिलासपुर सरदार बाहुल्य इलाका है। साथ ही यहां गंगवार वोटों की भी खासी तादाद है। इस सीट पर भी चुनाव में कांटे का मुकाबला होने जा रहा है।

अब्दुल्ला-हमजा मियां के उतरने से संघर्ष हुआ और दिलचस्प
स्वार-टांडा सीट पर नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) में शामिल अपना दल एस से नवाब परिवार के वंशज नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां मैदान में हैं। स्वार में इस बार भाजपा ने सहयोगी दल को सीट छोड़ी है। सपा से एक बार फिर अब्दुल्ला आजम डटे हैं। 2017 के चुनाव में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र को लेकर अब्दुल्ला की विधायकी हाईकोर्ट से रद हो गई थी। इस बार वह पूरे जोशो खरोश से मैदान में हैं। उनके समर्थक अब्दुल्ला के साथ सहानुभूति वोट की वजह बता रहे हैं तो हमजा मियां भाजपा के वोट बैंक के अलावा नवाब परिवार के वोट बैंक के साथ पहला चुनाव होने की वजह से चर्चा में हैं। कई देशों में रहकर पढ़ाई करके आने के बाद राजनीति में कूदना भी युवाओं में उनका क्रेज पैदा कर रहा है। कांग्रेस ने ठाकुर बिरादरी के राजा ठाकुर को मैदान में उतारा है। वहीं बसपा से अध्यापक शंकर सैनी मैदान में हैं। यह सैनी वोटों के साथ ही बसपा वोट बैंक के सहारे चुनाव मैदान में संघर्ष बता रहे हैं।

ये भी पढ़ें…

गुमनामी की जिंदगी जी रहे पूर्व विधायक बेगम किश्वर आरा के परिजन

बदला अंदाज : सोशल मीडिया पर बढ़ रही प्रत्याशियों की सक्रियता

संबंधित समाचार