कैंसर का मुख्य कारण आधुनिक जीवन शैली : डॉ. सचिन माहौर
झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी में विश्व कैंसर दिवस पर गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया। यहां स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग के रेडिएशन ऑनकोलोजिस्ट डॉ. सचिन माहौर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता …
झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी में विश्व कैंसर दिवस पर गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया। यहां स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग के रेडिएशन ऑनकोलोजिस्ट डॉ. सचिन माहौर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता पैदा कर इससे होने वाली मौतों को कम करना है।
कैंसर एक ऐसी स्थिति है जो की शरीर में असामान्य कोशिकाओं के बढ़ने से उत्पन्न होती है। यदि समय पर इसका पता चल जाये तो इस पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है लेकिन लोगों द्वारा इस बीमारी की गंभीरता को बिना समझे शुरुआती दौर में होने वाले लक्षणो को नजरंदाज किया जाता है। यही कारण है कि यह बीमारी धीरे धीरे गंभीर रूप ले लेती है यदि व्यक्ति शुरुआती दौर में सचेत रहे तो समय रहते इस बीमरी का पूर्णतया: इलाज संभव है।
कैंसर का मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली भी है, व्यक्ति का खान-पान एवं रख-रखाव इसका कारण है। वर्तमान में सबसे अधिक ओरल या मुह का कैंसर आक्रामक रूप से लोगों में फैल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 21.77 फीसदी मरीज ओरल कैंसर के हैं। ओरल कैंसर के लिए बहुत से रिस्क फेक्टर जिम्मेदार हैं, जैसे की तंबाकू का सेवन, शराब का सेवन, अत्यधिक धूम्रपान आदि से यह होता है।
आमतौर पर जो मरीज जांच के लिए आते हैं वह चौथी स्टेज पर होते हैं जिनमें से 40 प्रतिशत मरीजों कि रिकवरी पूर्णतया: हो जाती है।
उन्होंने बताया कि कैंसर के शुरुआती लक्षणो को व्यक्ति नजरंदाज करता है यदि उसी समय ठीक प्रकार से जांच कारवाई जाये तो कैंसर को गंभीर स्तिथि में आने से पहली ही उसे इलाज द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। वर्तमान समय में महिलाओं में कैंसर के बहुत अधिक बढ़ रहा है खासतौर से ब्रेस्ट कैंसर एवं सार्विकल कैंसर।
वर्तमान में पंजीकृत कैंसर के मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं, इसके अतिरिक्त बात करें बुंदेलखंड की तो यहां लगभग 100 प्रतिशत में से सात प्रतिशत व्यक्ति पित्त की थैली के कैंसर से ग्रसित हैं। डॉ. माहौर ने बताया कि जनपद में रानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज झाँसी में कैंसर की जांच एवं इलाज की सुविधा कैंसर के प्रकार के अनुसार कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी ,सर्जरी, हॉरमोनथेरेपी, टार्गेट थेरेपी और जींस थेरेपी द्वारा उपलब्ध हैI
पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. सुधा शर्मा ने बताया कि महिलाओं में होने वाले कैंसर से बचाव के लिए उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उन्हें स्वयं व उनके जीवनसाथी को लेना होगी ताकि कैंसर की रोकथाम की जा सके। इलाज से सर्वथा बेहतर है कैंसर रोकथाम अगली आने वाली पीढ़ी को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाई जाए।
ग्लोबोकॉन-2021 रिपोर्ट के अनुसार किसी भी महिला को अपने जीवन में किसी भी प्रकार के कैंसर होने का 10 प्रतिशत खतरा है।
इसी रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिलाओं में जो कैंसर के नए केसेस हुए हैं उनमें से 26.3 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर और 18.3 फीसदी सर्वाइकल कैंसर हैं। खास बात यह है कि इन 44 प्रतिशत कैंसर केस की अर्ली स्टेज में पहचान होने से महिलाओं को पूरी तरह बचाया जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होने बताया कि महिलाओं में कैंसर रोकथाम के लिए कुछ आवश्यक चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है जिससे कैंसर को शुरुआती समय पर ही पहचाना जा सकता है एवं महिला की जान बचाई जा सकती है। महिलाओं में कैंसर बचाव के लिए 30 साल की उम्र के बाद कुछ स्क्रीनिंग टेस्ट हर महिला के लिए बिना किसी लक्षण के भी अवश्य होने चाहिए। जैसे ब्रेस्ट कैंसर के लिए हर माह ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन, हर साल डॉक्टर द्वारा चेकअप और 40 साल की उम्र के बाद दो साल में मैमोग्राफी। इसी प्रकार सर्वाइकल कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए वीआईए टेस्ट, पेप्समेयर और एचपीवी डीएनए टेस्ट करवाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें:-कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चेहरे के लिए जाखड़ का नाम क्यों नहीं शामिल किया : केजरीवाल
