नाराजगी के भंवर में न फंस जाए जीत का पहिया

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विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। यूपी का सियासी संग्राम अब रोचक हो चला है। पहले चरण और दूसरे चरण में होने वाले मतदान में 113 सीटों पर प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इनमें चुनिंदा सीटों को छोड़ दिया जाए तो टिकट वितरण की रार अभी ठंडी नहीं हुई है। जिन्हें टिकट नहीं मिला, उनमें बहुतेरे पाला …

विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। यूपी का सियासी संग्राम अब रोचक हो चला है। पहले चरण और दूसरे चरण में होने वाले मतदान में 113 सीटों पर प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इनमें चुनिंदा सीटों को छोड़ दिया जाए तो टिकट वितरण की रार अभी ठंडी नहीं हुई है। जिन्हें टिकट नहीं मिला, उनमें बहुतेरे पाला बदलकर दूसरे दल से ताल ठोके हैं। वहीं कुछ निष्ठा की जंजीर में पुराने दल में ठहरे हैं। लेकिन, दिल में नाराजगी की आग ठंडी नहीं हुई है। इस नाराजगी के भंवर में दलों के जीत का पहिया फंस जाए तो हैरत नहीं।

नाराजगी की आग किसी एक नहीं कमोवेश हर दल की कहानी है। राजनीति के नाराज ‘फूफा’ से समीकरण बिगड़ने का डर हर सीट पर प्रत्याशियों के अलावा दलों के नियंताओं को भी सता रहा है। सबको भय है कि खुद के घर की भड़की चिंगारी से अपना ही आशियाना न जल जाए। इसे देखते हुए इस आग पर पानी डालने की कवायद भी तेज है। मार्गदर्शक मंडल के नेताओं को नाराज चेहरों को साधने का जिम्मा सौंपा गया है। ऐसे कई चेहरे हैं, जिनकी बात का लिहाज दलों के बहुतेरे नेता करते हैं। उनकी पूछ चुनाव में रूठों को मनाने के लिए बढ़ गई है।

न कोई छूटे, न कोई रूठे के मूलमंत्र पर काम कर रहे दलों के वरिष्ठ : टिकट वितरण के बाद भड़की असंतोष की चिंगारी को दबाने के लिए दलों के वरिष्ठों ने मोर्चा संभाला है। उन्हें दो मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है। एक तो अपने अनुभव के लाभ से प्रत्याशी को जिताने का भार कंधे पर है। दूसरी ओर न कोई छूटे, न कोई रूठे के मूलमंत्र को भी साकार कर जीत का रास्ता प्रशस्त करना है, जिससे नाराजगी के भंवर में पार्टी की जीत का पहिया न फंस जाए।

पहले व दूसरे चरण के जिले
पहले चरण में पश्चिमी यूपी के 11 जिलों शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), बुलंदशहर, मथुरा, आगरा, अलीगढ़ में 58 सीट पर 10 फरवरी वोट पड़ेंगे। दूसरे चरण में मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों की 27 सीटों सहित 55 विधानसभा क्षेत्रों में 14 फरवरी को मतदान होगा।

आखिरी दिनों में दिग्गजों ने झोंक दी है ताकत
पहले और दूसरे चरण के चुनाव में 113 सीटों पर जीत का दम भरने के लिए दलों के दिग्गजों ने अखिर के बचे दिनों में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के दिग्गज और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हर सीट को मथ कर उससे जीत का मक्खन निकालने में लगे हैं। इस महत्वपूर्ण बेल्ट में भाजपा के मुकाबले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कम उपस्थिति नेताओं और जनता दोनों को खल रहा है। यह कमी चुनाव के परिणाम पर असर डाला सकती है। हालांकि पार्टी के नेताओं की मानें तो अगले चंद दिन में अखिलेश भी इन सीटों पर पूरा दमखम दिखाने को जनसभाओं में उतरेंगे। वहीं हाथी की चाल को रफ्तार देने और अपने प्रत्याशियों में दम भरने के लिए अब बसपा सुप्रीमो मायावती भी आरपार की जंग में उतर पड़ी हैं। उन्होने एक दिन पहले ही इस बेल्ट में अपनी उपस्थिति से दूसरे दलोंं में हलचल मचा दी है। क्योंकि भाजपा नेता उनकी अभी ठंड खत्म न होने का तंज भी कसा था। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने शुरूआती दौर में ही इस क्षेत्र में जनसभा व रैली कर उपस्थिति दर्ज करा दी थी।

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