UP Elections 2022 : जातीय ध्रुवीकरण पर निर्भर करेगा परिणाम
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। बिलाारी विधानसभा क्षेत्र में जातीय ध्रुवीकरण पर परिणाम निर्भर करेगा। इस बात की बुनियाद तैयार हो गई है। दलीय उम्मीदवार मुद्दे गिना रहे हैं, जबकि निर्दलियों की संख्या सिमटी हुई है। राजनीतिक समीक्षक दावा करते हैं कि इस बार भी ध्रुवीकरण पर ही चुनाव परिणाम निर्भर करेगा। वर्ष 2012 में नए परिसीमन के …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। बिलाारी विधानसभा क्षेत्र में जातीय ध्रुवीकरण पर परिणाम निर्भर करेगा। इस बात की बुनियाद तैयार हो गई है। दलीय उम्मीदवार मुद्दे गिना रहे हैं, जबकि निर्दलियों की संख्या सिमटी हुई है। राजनीतिक समीक्षक दावा करते हैं कि इस बार भी ध्रुवीकरण पर ही चुनाव परिणाम निर्भर करेगा।

वर्ष 2012 में नए परिसीमन के आधार पर बिलारी क्षेत्र का निर्धारण हुआ। पहले चुनाव में बसपा ने समाजवादी पार्टी को सीधी टक्कर दी थी। यहां अनुसूचित मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। लेकिन, नए परिसीमन के पहले चुनाव में मामूली मत के अंतर से मोहम्मद इरफान यहां चुनाव जीत गए। कार्यकाल के बीच में उनका निधन हो गया। उप चुनाव में बेटे मोहम्मद फहीम को सफलता मिली, जबकि 2017 के चुनाव में भी सपा और भाजपा के बीच परंपरागत जंग हुई। इसमें सपा उम्मीदवार के जीत का दायरा बढ़ गया।
अबकी यहां फिर कड़ा मुकाबला है। बसपा ने अनिल चौधरी को मैदान में उतारा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी में पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी पर दांव लगाया है। इस क्षेत्र में अनुसूचित मतदाताओं की संख्या अधिक है। चुनावी आंकड़े में हिंदू और मुस्लिम मतों में गहरा अंतर है, लेकिन चुनावी जंग में जातीय ध्रुवीकरण हो जाता है। अब तक उसी आधार पर चुनाव परिणाम निकले हैं। जानकार मानते हैं कि मुद्दा विहीन चुनाव में जातीय ध्रुवीकरण पर चुनाव परिणाम निर्भर करेगा। यहां रोचक मुकाबले की बुनियाद तैयार हो गई है।

ये भी पढ़ें : 97 लाख से अधिक मतदाता तय करेंगे प्रत्याशियों का भाग्य
