राहत की बात

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, बीते 24 घंटे में देश में 71,365 नए मामले दर्ज किये गए हैं। इस दौरान कोरोना संक्रमण के चलते 1,217 लोगों की मौत भी दर्ज की गई है। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद देश …

देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, बीते 24 घंटे में देश में 71,365 नए मामले दर्ज किये गए हैं। इस दौरान कोरोना संक्रमण के चलते 1,217 लोगों की मौत भी दर्ज की गई है। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद देश में कुल सक्रिय मामलों में भी कमी आई है।

एक माह बाद पिछले तीन दिन से लगातार एक लाख से कम मामले आ रहे हैं। संक्रमण दर में भी गिरावट आई है। कोरोना के घटते मामले संकेत दे रहे हैं कि कोरोना की तीसरी लहर अब कमजोर पड़ रही है। डब्ल्यूएचओ भी महामारी में राहत की उम्मीद जता रहा है लेकिन संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों की संख्या अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। देश में 20 मार्च 2020 के बाद से अब तक कोरोना संक्रमण के चलते 5,05,279 लोगों की मौत दर्ज की गई है।

सुखद यह है कि अधिकतर राज्यों में कक्षा नौ से ऊपर के स्कूल खुलने लगे हैं। सही बात है कि जब सब कुछ खुलने लगा है तो स्कूल क्यों बंद रहें। पिछले दो सालों में बच्चों ने महामारी के भय, मानसिक तनाव तथा घुटन का वातावरण जीया है। कहने को बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प मौजूद था, मगर कितने प्रतिशत बच्चों को यह लाभ मिला? अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तो यह कोशिश कुछ सीमा तक सफल रही, लेकिन सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं की मजबूरी किसी से छिपी नहीं है।

बहरहाल ऑनलाइन पढ़ाई परंपरागत पढ़ाई का अंतिम विकल्प नहीं है क्योंकि इसकी अपनी सीमाएं हैं। बहरहाल, देश में सामान्य गतिविधियां चलने लगी हैं। केंद्र सरकार ने सौ फीसदी उपस्थिति के साथ कार्यालय चलाने को कह दिया। इसके बावजूद कोरोना के बचाव के मंत्रों मास्क, शारीरिक दूरी, सैनिटाइजेशन और टीकाकरण को हमें नहीं भूलना चाहिए।

संक्रमण दर में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि महामारी चली गई है। दरअसल, महामारी विशेषज्ञ भी आश्वस्त नहीं हैं कि फिर कोई कोरोना का नया स्वरूप नहीं आएगा। यह वायरस हमारे जीवन का हिस्सा बना रहेगा और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को परेशान करता ही रहेगा। याद रहे कि किसी भी तरह की लापरवाही हमें बड़े जोखिम में ला सकती है। पहली लहर के बाद लापरवाही की हमने बड़ी कीमत चुकाई थी। इस सबक को हम अच्छी तरह याद रखें। सुरक्षित दूरी, थर्मल स्क्रीनिंग से जांच और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।