UP Election 2022 : तब थे दुश्मन, अब बन गए दोस्त
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। 28 साल के बसपाई लाखन सिंह सैनी शनिवार को सपाई हो गए। उन्होंने दलितों और अति पिछड़ों की लड़ाई के लिए यह पाला बदल किया है। अब पिछड़ों के अधिकार की रक्षा के लिए अपना समय व्यतीत करेंगे। चुनाव के दौरान इस कदम की शिद्दत से चर्चा हो रही है। वर्ष 1993 में …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। 28 साल के बसपाई लाखन सिंह सैनी शनिवार को सपाई हो गए। उन्होंने दलितों और अति पिछड़ों की लड़ाई के लिए यह पाला बदल किया है। अब पिछड़ों के अधिकार की रक्षा के लिए अपना समय व्यतीत करेंगे। चुनाव के दौरान इस कदम की शिद्दत से चर्चा हो रही है।
वर्ष 1993 में बसपा के महानगर मंत्री बने सैनी अधिवक्ता भी हैं। बसपा में उनकी मेहनत और वफादारी का हद तक लाभ मिला। लेकिन, नुकसान ने की पीछा नहीं छोड़ा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बिलारी क्षेत्र से बसपा के उम्मीदवार रहे और कांटे की टक्कर में हार गए। तब मोहम्मद इरफान सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे। इरफान को 55694 और लाखन को 54154 मत मिले थे। पोस्टल मतों की गिनती के आधार पर तब चुनाव परिणाम घोषित हुआ था।
उधर, 2010 के स्थानीय निकाय के चुनाव में लाखन सिंह की पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित किया गया। लेकिन, ऐन वक्त पर पार्टी का निर्णय बदल गया। जबकि बसपा ने मुरादाबाद क्षेत्र से 20 मार्च 2012 को उन्हें लोकसभा प्रभारी नियुक्त किया। इस दौरान 13 माह 26 दिन चुनाव की तैयारी में जुटे रहे।
लेकिन, पार्टी ने फिर निर्णय बदल दिया। यहां मेरठ के मीट कारोबारी याकूब कुरैशी को यहां पार्टी ने अपना चेहरा बना दिया। 2017 के मेयर के चुनाव में भी लाखन पार्टी के उम्मीदवार रहे।
बातचीत में लाखन सिंह कहते हैं कि 28 साल तक बसपा में सिपाही के तौर पर कार्य किया। अब सपा में योगदान करुंगा। चौपाल पर चर्चा इस बात की है कि बसपा की राजनीति में स्वामी प्रसाद मौर्य के नजदीकी रहे लाखन ने उनसे रिश्ते में पाला बदल किया है। यानी कि जमाने से सपा के राजनीतिक दुश्मन लाखन अब दोस्त हो गए।
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