भाजपा-सपा : एक दूसरे का किला भेदने की चुनौती
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। वक्त नाजुक, सामने लोकतंत्र का फर्ज, हाथ में ईवीएम का बटन। मतदाताओं के विवेक पर राजनीति की दिशा निर्धारण की जिम्मेदारी। सोच समझकर मतदान करने से ही सही तस्वीर और तकदीर सामने आएगी। दूसरे चरण में 55 सीटों पर सपा-भाजपा के सामने एक दूसरे का किला भेदने की चुनौती है, 2017 में …
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। वक्त नाजुक, सामने लोकतंत्र का फर्ज, हाथ में ईवीएम का बटन। मतदाताओं के विवेक पर राजनीति की दिशा निर्धारण की जिम्मेदारी। सोच समझकर मतदान करने से ही सही तस्वीर और तकदीर सामने आएगी। दूसरे चरण में 55 सीटों पर सपा-भाजपा के सामने एक दूसरे का किला भेदने की चुनौती है, 2017 में विधानसभा के चुनाव में इन 55 में से 27 पर सपा का जादू चला था। दूसरे चरण में नौ जिलों में सोमवार को वोट पड़ेगा। इस चरण में सपा और भाजपा में एक दूसरे का किला भेदने की चुनौती है।
चुनौती भाजपा के नियंताओं और सूरमाओं पर अधिक, क्योंकि 55 सीटों में से 27 पर पिछली बार सपा की साइकिल का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला था। यह बात दीगर है कि बावजूद इसके सत्ता की कुंजी भाजपा के हाथ लगी। इस समीकरण को भांप भाजपा ने नियंताओं ने इस चरण की अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए सपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में किलेबंदी तेज की है। बाबा के बुलडोजर की चर्चा भी दूसरे चरण की सीटों पर मोदी के नाम से अधिक चल रही है। योगी के ताबड़तोड़ दौरे ने इन इलाकों में जान फूंक कर अखिलेश और जयंत को टेंशन में डाला है। दोनों दलों के दिग्गजों ने इन 55 सीटों को फतह करने के महत्व को देखते हुए शह और मात में कोई कसर नहीं छोड़ा है। क्योंकि पिछली बार 27 पर सपा जीती थी। जबकि 13 पर कमल खिला और 11 सीट पर बसपा के हाथी की चिंघाड़ ने अपनी दमदार उपस्थिति कराई थी।
मुख्य बातें…
- दूसरे चरण की 55 में से 27 सीटों पर चला था सपा का जादू, 13 सीट पर खिला था कमल, 11 पर हाथी की चिंघाड़
- कई सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं पर जीत का दारोमदार, 11 सीटों पर 2017 में जीते थे मुस्लिम कैंडिडेट
- मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में से 14 कमल और 13 पर साइकिल का कब्जा
प्रियंका के ससुराल में कांग्रेस को जीत का वनवास खत्म होने की आस : दूसरे चरण में मुरादाबाद मंडल की 27 सीटें शामिल हैं। मुरादाबाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा की ससुराल है। फिर भी यहां तीन दशक से कांग्रेस जीत का वनवास झेल रही है। इस चुनाव में कांग्रेसियों को लड़की हूं लड़ सकती हूं के प्रियंका के नारे व प्रतिज्ञा के दम पर वनवास खत्म होने की आस है तो दो चुनाव से अपेक्षित सफलता न पाए बसपाई हाथी की चिंघाड़ सुनने को बेताब हैं।
विरोधी के दुर्ग पर दहाड़, सूबे में बजेगा उसका डंका : 55 सीटों पर किलेबंदी में सपा-भाजपा में जो भी विरोधी के दुर्ग पर दहाड़ बरकरार रखने में सफल होगा, सूबे की राजनीति में उस दल का डंका जरूर बजेगा। वह दल डंके की चोट पर विधानसभा में अपना दबदबा कायम रख पाने में कामयाब होगा।
पश्चिम की जीत व पूरब के मेल से खुलेगा सत्ता का द्वार : पश्चिमी यूपी में दो चरणों के चुनाव में कुल 113 सीटें हैं। पहले चरण में दस फरवरी को 58 सीटों पर करीब साठ फीसदी मतदान हो चुका है। अब दूसरे चरण की 55 सीटें सत्ता की दहलीज तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाएंगीं।
इन जिलों में होगा मतदान : दूसरे चरण में नौ जिलों मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर, बरेली, सहारनपुर, बदायूं और शाहजहांपुर में 55 सीटों पर सोमवार को वोट पड़ेगा। इन सीटों में मुरादाबाद मंडल की 27 सीटें भी शामिल हैं।
विजय रथ को आगे बढ़ाने में दिग्गजों ने झोंकी ताकत
दूसरे चरण में विजय का रथ हांकने में दलों के दिग्गजों ने खूब ताकत झोंकी। किसी ने कोई कसर नहीं छोड़ा। भाजपा के विजय रथ को आगे बढ़ाने में मोदी, योगी, शाह, नड्डा,राजनाथ, केशव, दिनेश शर्मा ने ताकत दिखाई है तो सपा की जीत का सिलसिला बरकरार रखने के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव और रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी ने हुंकार भरी थी। बसपा सुप्रीमो ने भी आखिरी के दिनों में अपनी उपस्थिति से राजनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया है। प्रियंका गांधी ने रामपुर, मुरादाबाद आदि जिलों में सभा कर लड़ाका होने का दम दिखाया था।
दांव पर है इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा
दूसरे चरण में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसमें सपा सांसद और तीन बार मंत्री रहे रापमुर से सपा प्रत्याशी आजम खां, राज्यमंत्री गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख, महबूब अली, धर्मपाल सिंह, मंत्री सुरेश खन्ना, पूर्व मंत्री कमाल अख्तर की सियासी तकदीर कसौटी पर कसी जाएगी।
