मुरादाबाद : वोट की चोट से भाग्यविधाताओं ने ईवीएम में कैद की प्रत्याशियों की तकदीर
विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। लोकतंत्र का महापर्व और वेलेंटाइन डे का मेल, विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान में पिछले चुनावों की अपेक्षा कम रही रार। खुशगवार मौसम और वसंत उल्लास में वोट की चोट से लोकतंत्र के भाग्य विधाताओं ने ईवीएम में प्रत्याशियों की तकदीर कैद कर दी। नौ जिलों की 55 सीटों …
विनोद श्रीवास्तव, अमृत विचार। लोकतंत्र का महापर्व और वेलेंटाइन डे का मेल, विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान में पिछले चुनावों की अपेक्षा कम रही रार। खुशगवार मौसम और वसंत उल्लास में वोट की चोट से लोकतंत्र के भाग्य विधाताओं ने ईवीएम में प्रत्याशियों की तकदीर कैद कर दी। नौ जिलों की 55 सीटों पर हुए मतदान में मंडल के कई दिग्गजों का रसूख दांव पर रहा। अंतिम फैसला तो दस मार्च को ईवीएम के लॉक खुलने पर ही सामने आएगा।
दूसरे चरण में नौ जिलों में हुए मतदान में कई राजनीतिक सूरमाओं का सियासी रसूख दांव पर है। प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना, राज्यमंत्री गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख, रामपुर से सपा के दिग्गज नेता सांसद और तीन बार के मंत्री रहे आजम खां, मुरादाबाद के कांठ सीट से सपा के पूर्व मंत्री कमाल अख्तर, पूर्व मंत्री महबूब अली के अलावा धर्मपाल सिंह की तकदीर का फैसला जनता ने वोट देकर ईवीएम में बंद कर दिया।
हालांकि मतदान के आखिरी वक्त तक दिग्गज व उनके खांटी समर्थकों के अलावा दलों के ऐसे नियंता जो पर्दे के पीछे सियासी जंग की इबारत लिखने में अहम भूमिका निभाते हैं वह भी नब्ज भांपने में लगे रहे। लेकिन सयाने मतदाताओं ने खामोशी से अपना काम सब कुछ ईवीएम पर छोड़ दिया। मुरादाबाद मंडल के 27 सीटों पर 2017 के समीकरणों का प्रभाव इस बार के मतदान में अंतिम समय तक दिखा। 17वीं विधानसभा के लिए पिछली दफा हुए विस चुनाव में मंडल के पांच जिलों में सपा और भाजपा में कांटे की जोर आजमाइश में तराजू का पलड़ा भाजपा के पक्ष में रहा। 14-13 के अंतर से भाजपा मंडल में हावी रही। तो सपा दूसरे नंबर पर।
मगर स्वार सीट से अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द होने पर यह आंकड़ा 14-12 का हो गया था। इस आंकड़े में उछाल लाकर मंडल में क्लीन स्वीप के लिए पूरा दमखम दोनों दलों के बड़े सूरमाओं के अलावा चुनावी मैदान में खड़े दिग्गजों ने दिखाया है। अब ऊंट किस करवट बैठेगा इसका फैसला तो दस मार्च को फाल्गुनी माहौल में ईवीएम का बटन खुलने पर ही पता चलेगा, मगर मतदाताओं के उंगलियों की रवायत जानने में दिग्गज व अन्य प्रत्याशियों में बेचैनी बरकरार है।
कमल व साइकिल के जोर में हाथी व हाथ का भी हिलोर
पश्चिमी यूपी में हुए दूसरे चरण में कई सीटों पर आमने सामने कमल व साइकिल में जोर आजमाइश रही। मुरादाबाद में तो लगभग हर सीट की यही कहानी दिखी, मगर कई सीटों पर हाथी व हाथ भी हिलोर मार कर समीकरणों पर अपनी छाप छोड़ने को बेताब रहा।
इन जिलों में हुआ मतदान
दूसरे चरण में नौ जिलों मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर, बरेली, सहारनपुर, बदायूं और शाहजहांपुर में 55 सीटों पर वोट पड़ा। इन सीटों में तकरीबन आधी सीटें मुरादाबाद मंडल की 27 हैं। जिनके परिणाम से पश्चिमी यूपी की सियासत की इबारत भी तय होगी।
ईवीएम के माथे पर भी लगेगा जीत हार का दोष
2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव, यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव के अलावा कई अन्य राज्यों में विरोधी दलों ने हार का सारा दोष ईवीएम के माथे मढ़ दिया था। इस बार भी यदि समीकरण दलों के मनमाफिक नहीं रहे तो दंगल में बिन खता भी सजा के लिए ईवीएम की साख को तैयार रहना होगा।
