लखनऊ: खंडहर हो चुके मकान में जान हथेली पर लेकर रह रहे वन विभाग के 50 परिवार, पढ़ें…

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गौरी त्रिवेदी/अमृत विचार/लखनऊ। राजधानी में घर मिलना सपना पूरे होने जैसा होता है, लेकिन नहरी स्थिति वन विभाग के मुख्य दफ्तर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ऐसा सरकारी घर अलॉट किया गया कि अगर वह सपने में आ जाए तो नींद ही गायब हो जाए। खंडहर बन चुके मकान को घर कहना भी हास्यास्पद ऐसा …

गौरी त्रिवेदी/अमृत विचार/लखनऊ। राजधानी में घर मिलना सपना पूरे होने जैसा होता है, लेकिन नहरी स्थिति वन विभाग के मुख्य दफ्तर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ऐसा सरकारी घर अलॉट किया गया कि अगर वह सपने में आ जाए तो नींद ही गायब हो जाए।

खंडहर बन चुके मकान को घर कहना भी हास्यास्पद

ऐसा निवास स्थान जो कहीं से भी घर नजर नहीं आता। ऐसे खंडहर मकान में अपनी जान हथेली पर रख लगभग 150 की संख्या में कर्मचारी इन आवासों में जीवन काट रहे हैं। सरकारी क्वार्टरों की ये स्थिति लगभग पन्द्रह सालों से है। विभाग के सरकारी क्वार्टर की स्थिति देखकर यह नहीं लगता कि यह सरकारी कर्मचारियों के आवास हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि दम है तो आला अधिकारी इन आवासों में एक रात गुजार के दिखायें।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने बार बार की जर्जर घर की शिकायत

चौथी श्रेणी के इन कर्मचारियों का कहना है कि हमारे द्वारा कई बार विभाग से शिकायत करवायी गई, लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता है। आवासों की स्थिति जब ज्यादा गम्भीर होती है। तब भी मरम्मत के नाम पर खानापूर्ती की जाती है।

शौचालयों, दरवाजों समेत खिड़कियों की हालात बदहाल

आवासों के नजदीक बने शौचालयों की स्थिति जर्जर है। जिनमें कर्मचारियों को शौच जाने में काफी मशक्कत उठानी पड़ रही है। आवास पर ही मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि हम शौच जाने से डरते हैं। यदि हिम्मत है तो आला अधिकारी इन्ही शौचालयों का प्रयोग कर के दिखायें। इतना ही नहीं मकानों के खिड़कियों, दरवाजों, की स्थिति बेहद खराब है। हमें डर है कि खिड़कियों के गिरने से हमारे बच्चों को नुकसान ना हो जायें।

विगत कई वर्षों से बजट ना मिलने की वजह से आवासों की स्थिति बदहाल है। जितना बजट आता है। उसी के अनुरुप हम आवश्यक मरम्मत करवातें हैं। आवासों की स्थिति को देखते हुये विभाग को नये मकान के लिये प्रस्ताव भेजा है। इसके आलावा आवासों को देखकर विशेष मरम्मत करवायी जायेगी।

डा. रवि सिंह, डीएफओ अवध

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