माघ पूर्णिमा का उपवास कल, जानिए पूजन विधि

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हल्द्वानी, अमृत विचार। 16 फरवरी 2022 बुधवार को माघ पूर्णिमा का उपवास किया जाएगा। माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। माघ मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा मघा नक्षत्र में सिंह राशि में स्थित होते हैं माघ नक्षत्र में होने के कारण इस माह की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा गया है। इस बारे में …

हल्द्वानी, अमृत विचार। 16 फरवरी 2022 बुधवार को माघ पूर्णिमा का उपवास किया जाएगा। माघ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। माघ मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा मघा नक्षत्र में सिंह राशि में स्थित होते हैं माघ नक्षत्र में होने के कारण इस माह की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा गया है। इस बारे में अधिक जानकारी साझा कर रही हैं हल्द्वानी निवासी जाने मानी ज्योतिषाचार्य मंजू जोशी  जानिए कैसे फलदायी है माघ पूर्णिमा का उपवास…

चंद्रोदय के समय चंद्रदेव अपने मित्र सूर्य की राशि में रहेंगे चंद्र मघा नक्षत्र में और सूर्य कुंभ राशि में और घनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे सूर्य और गुरु की पूर्ण दृष्टि चंद्रमा पर होगी जिससे कि व्यापारियों के लिए अति शुभ समय रहेगा व्यापार में वृद्धि और नए कार्य प्रारंभ करने हेतु अति शुभ दिन रहेगा। माघ पूर्णिमा पर शोभन योग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यतानुसार माघ पूर्णिमा पर सभी देवतागण देवलोक से पृथ्वी पर गंगा स्नान हेतु प्रयागराज आते हैं इसलिए माघ पूर्णिमा को गंगा स्नान को अति शुभ फल कारक माना जाता है।माघ पूर्णिमा से शीत ऋतु समाप्त होकर ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होती है इसलिए भी मांग पूर्णिमा विशेष मानी गई है।

मूहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 15 फरवरी मंगलवार रात्रि 09 बजकर 45 मिनट से 16 फरवरी बुधवार को रात्रि 10 बजकर 28 मिनट पर समाप्त।
चंद्रोदय होगा शाम 5:53 पर।

पूजा विधि
नित्य कर्म से निवृत्त होकर घर को स्वच्छ कर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें यदि संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। सूर्य के सम्मुख खड़े होकर सूर्य को तिल डालकर अर्घ्य प्रदान करें सूर्य देव को धूप दीप अर्पित करें। तत्पश्चात मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराकर आसन प्रदान करें। भगवान विष्णु को रोली, अक्षत कुमकुम, पीतांबर, पुष्प,दूर्वा, धूप, दीप अर्पित करें। सत्यनारायण की कथा का पाठ करें। भगवान विष्णु को भोग स्वरूप चरणामृत, पान सुपारी, पंचमेवा, पंच मिठाई, पंच फल, तुलसी के पत्ते एवं विशेष रूप से खीर का भोग अवश्य लगाएं।

घी की 11 बत्तियां जला कर भगवान विष्णु की आरती करें।
चंद्रोदय के समय चंद्रदेव को स्टील या चांदी के बर्तन से अर्घ्य प्रदान करें रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, धूप दीप, नैवेद्य अर्पित कर घी के दीपक से आरती करें और खीर का भोग लगाएं।

जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर है नीच का है ऐसे जातकों को सफेद वस्तुओं का दान जैसे सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, दही, घी, मोती, शंख, इत्यादि का दान करना अति शुभ रहेगा।

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