लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता विरोधी दल पूर्व मंत्री अहमद हसन 88 व उनकी पत्नी 80 का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया। दोनों ने डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अंतिम सांस ली। हसन व उनकी पत्नी को उनके गृह जिले अम्बेडकर नगर के पैतृक गांव जलालपुर में रविवार सुबह सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके दो बेटे व पांच बेटियां हैं।
पत्नी भी चल रही थीं लंबे समय से बीमार
अहमद हसन व उनकी पत्नी काफी समय से बीमार चल रहे थे। अहमद हसन को शुक्रवार को डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था। शनिवार को पूर्वान्ह 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से परिवार में शोक था, इसी बीच संस्थान में क्रिटिकल केयर यूनिट में ही पहले से भर्ती उनकी पत्नी नजमा बेगम का रात करीब 10 बजे निधन हो गया।
अहमद हसन के निधन से सपा का झंडा सपा मुख्यालय में आधा झुका दिया गया। उनके सम्मान में लखनऊ में रथ यात्रा का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया। सपा ने उनके निधन को पार्टी की अपूरणीय क्षति मानते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे अहमद हसन राज्य पुलिस सेवा व बाद में प्रोन्नत होकर भारतीय पुलिस सेवा में रहे। बाद में सपा में राजनीतिक की शुरुआत की। वह सपा के कद्दावर नेता थे। सपा की सरकार में वह स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री भी रहे।
अहमद हसन के निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। सपा ने ट्वीट के जरिये उनके निधन की जानकारी दी। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेेश यादव, पूर्व मंत्री शिव पाल सिंह यादव, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने शोक प्रकट किया है।
भारतीय पुलिस सेवा से की थी करियर की शुरुआत
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि अहमद हसन भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के उपरांत करीब 40 वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। तत्कालीन सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सरलता सहजता व वाकपटुता के लिए जाने जाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि आईपीएस की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और तभी से ही विधान परिषद के सदस्य रहे।
जनप्रिय नेता के रूप में थी हसन की छवि
तत्कालीन सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके अहमद हसन एक जनप्रिय नेता थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में शून्यता आई है जिसकी भरपाई हो पाना कठिन है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने कहा कि सपा की तत्कालीन सरकार में साथी रहे अहमद हसन कैबिनेट मंत्री के रूप में अपनी सरलता, सहजता व वाकपटुता से सभी लोगों के प्रिय रहे।
सदन चलने के दौरान बिगड़ी थी तबीयत
बीती 16 दिसंबर को सदन चलने के दौरान उनकी तबीयत खराब हुई थी। सीने में दर्द की शिकायत होने पर उन्हें किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के लॉरी कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था, उस दौरान उनके हाल-चाल लेने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भी पहुंचे थे। यहां से हालत सुधरने के बाद डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका इलाज चल रहा था।
