कानपुर: रिक्शा चालक ने खोला 75 लाख के पीएफ घोटाले का राज, अधिकारी मौन
कानपुर। सात महीने पहले केस्को के 240 कर्मचारियों के साथ करीब 75 लाख रुपये का पीएफ घोटाला हुआ था। इसमें ईपीएफओ कार्यालय में एक रिक्शा चालक की शिकायत के बाद नया राजफाश हुआ है। उसके नाम से एक बोगस कंपनी का ईपीएफओ में पंजीकरण करा दिया गया, लेकिन इससे कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इस …
कानपुर। सात महीने पहले केस्को के 240 कर्मचारियों के साथ करीब 75 लाख रुपये का पीएफ घोटाला हुआ था। इसमें ईपीएफओ कार्यालय में एक रिक्शा चालक की शिकायत के बाद नया राजफाश हुआ है। उसके नाम से एक बोगस कंपनी का ईपीएफओ में पंजीकरण करा दिया गया, लेकिन इससे कोई लेनदेन नहीं हुआ है। इस मामले पर अब ईपीएफओ के अधिकारी मौन हैं।
केस्को के संविदा कर्मचारी संगठन के महामंत्री दिनेश सिह भोले ने बताया कि करीब 24 बोगस कंपनियों के पंजीकरण हुए हैं। केस्को संविदा कर्मचारियों से जुड़े पीएफ घोटाले में क्राइम ब्रांच ने मुख्य आरोपित मुकुल चौबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वह छह महीने से जेल में है। मुकुल ने पुलिस को बताया था कि उसने ईपीएफओ में संविदा कर्मी के रूप में कार्य के दौरान यह काम किया, लेकिन ईपीएफओ ने उसके संविदा कर्मी होने के दावे को खारिज कर दिया था।
मुकुल ने ईपीएफओ में बड़ी संख्या में बोगस कंपनियों का पंजीकरण कराया था। एसएमसी मैन पावर सॉल्यूशन कंपनी का पंजीकरण एक साल पहले हुआ था। कंपनी दर्शनपुरवा निवासी रिक्शा चालक ललित गुप्ता के नाम पंजीकृत है। उसे 1०० कर्मचारियों का मालिक दिखाया गया है।
ललित ने बताया कि इसकी जानकारी मिलने पर वह ईपीएफओ के अधिकारियों से मिला और लिखित शिकायत की। उसके अनुसार उसने अपना आधार कार्ड व फोटो मुकुल को दी थी। मुकुल ने इनकी मदद से यह फजीबाड़ा किया।
भोले ने कराई थी कार्रवाई
केस्को के संविदा कर्मचारी संगठन के महामंत्री दिनेश सिह भोले ने बताया कि उन्होंने ही पूर्व में भी कर्मचारियों के हित में इस मामले की जांच कराई थी। अब जाहिद लेदर नाम की एक और बोगस कंपनी के बारे में पता चला है। उन्होंने पुन: जांच की मांग की है।
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