लखनऊ: सरकारी गाड़ियां अस्पतालों में फांक रही धूल, नीलामी न होने से लाखों का नुकसान
लखनऊ। राजधानी के स्वास्थ विभाग में तैनात अफसर खुद लग्जरी कारों के शौकीन हैं। जब कि कई सरकारी अस्पतालों में सरकारी एंबुलेंस कंडम होने के बाद धूल फांक रही हैं। उसे नीलाम करने की बजाए खुले में खड़ा कर दिया गया है। जिससे सभी गाड़ियां धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो गईं। जिसके कारण स्वास्थ विभाग …
लखनऊ। राजधानी के स्वास्थ विभाग में तैनात अफसर खुद लग्जरी कारों के शौकीन हैं। जब कि कई सरकारी अस्पतालों में सरकारी एंबुलेंस कंडम होने के बाद धूल फांक रही हैं। उसे नीलाम करने की बजाए खुले में खड़ा कर दिया गया है। जिससे सभी गाड़ियां धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो गईं। जिसके कारण स्वास्थ विभाग को लाखों का नुकसान भी हो रहा है।
लखनऊ के श्यामाप्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस का उपयोग करने के बाद जब कंडम हो गईं तो नीलाम करने की बजाए खुले में खड़ा कर दिया गया। जिससे वह कबाड़ हालत में पहुंच गई हैं। लापरवाही का आलम यह है कि यह सरकारी गाड़ियां सालों से खड़ी हैं लेकिन नीलामी कमेटी तक बनाना जरूरी नहीं समझा गया। बताते चले कि करोड़ों रुपए खर्च करके सरकार एंबुलेस व सरकारी वाहनों की सुविधा अस्पताल प्रबंधन को उपलब्ध कराती है।
लेकिन वाहनों की लाइफलाइन खत्म हो जाने के बाद असुरक्षित स्थानों पर खड़ी कर दिया जाता है, धूल फांकने व बारिश के कारण वह कबाड़ में तब्दील हो जाती हैं, अगर समय से नीलाम करने की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो लाखों रुपए सरकारी राजस्व में पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि इस लापरवाही पर सभी अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल सूत्रों की मानें तो नीलामी के लिए अंदरखाते चार सदस्यी कमेटी का गठन किया गया है।
लेकिन रेट महज 20 से 30 हजार रुपए तक मिलने का अनुमान लगने पर छवि खराब न हो, इसलिए सार्वजनिक नहीं किया जा रहा। अस्पताल में दो एंबुलेंस खड़ी नजर आती हैं। जिनको कबाड़ के भाव भी शायद ही कोई खरीदने को तैयार होगा। कंडम वाहन जहां खड़ी हैं लोगों को आने-जाने में मुश्किलें उठानी पड़ती हैं।
दो वर्ष में हुआ कितने का नुकसान
अस्पताल सूत्रों की माने तो खड़ी कंडम गाड़ियों की दो वर्ष पहले अगर 50 हजार रूपये कीमत रही होगी तो कुल दो लाख पचास हजार रुपये बनते, वहीं अब इनकी हालत पूरी तरह कबाड़ हो चुकी है। अनुमानति कीमत 20 हजार हो गई है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग को पूरे डेढ़ लाख रुपये का नुकसान होगा।
कैसे होती है नीलामी
अस्पताल डायरेक्टर कंडम गाड़ियों को नीलाम करने के लिए डीजी दफ्तर में बने सेल को पत्र लिखकर जानकारी देते हैं। जहां इसकी पुष्टि होने के बाद गाड़ियों की नीलामी की जाती है। उसके बाद आरटीओ के पास आदेश भेजा जाता है, जहां से टीम गठित कर इसकी नीलामी कराई जाती है। जिसमें जिला अधिकारी से एसीएम वन, अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक, स्वास्थ्य भवन के परिवहन विभाग से भी एक सदस्य को टीम में शामिल किया जाता है।
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