मथुरा: बरसाने की होली में रंगे चरकुला के दीप
मथुरा। कृष्ण की नगरी बरसाने की होली के तो सभी दिवानें है। होली में भले ही दीपों का कोई संबध नहीं है। मगर पुरातन कला के बिना ब्रज संस्कृति की परिभाषा अधूरी है बरसाने की होली में 108 दीपों से सजे दिपोत्सव मनाया जा रहा है। दीप को लेकर नृत्य अब होली का हिस्सा बन …
मथुरा। कृष्ण की नगरी बरसाने की होली के तो सभी दिवानें है। होली में भले ही दीपों का कोई संबध नहीं है। मगर पुरातन कला के बिना ब्रज संस्कृति की परिभाषा अधूरी है बरसाने की होली में 108 दीपों से सजे दिपोत्सव मनाया जा रहा है। दीप को लेकर नृत्य अब होली का हिस्सा बन चुका है। होली के आयोजन में चरकुला नृत्य का आयोजन देखने को मिलता है।
द्वापर युगी चरकुला नृत्य की अनूठी और कलात्मक परंपरा गोवर्धन के गांव मुखराई से जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि मुखराई गांव राधारानी की ननिहाल है, उनकी नानी का नाम मुखरा देवी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रमास की शुक्लपक्ष अष्टमी को पिता वृषभानु और माता कीरत कुमारी का आंगन राधारानी की किलकारियों से गूंज उठा। जब यह समाचार नानी मुखरा देवी ने सुना तो वह बहुत खुश हुईं।
मुखरा देवी ने समीप रखे रथ के पहिये पर 108 दीप रखे और प्रज्वलित कर नाचने लगीं। इसी नृत्य को चरकुला कहा जाता है। होली के दूसरे दिन ग्राम मुखराई में ग्रामीण महिलाएं 108 जलते दीपों के साथ प्रतिवर्ष चरकुला नृत्य की परंपरा का निर्वहन करती हैं। महिलाएं जब नृत्य करती हैं तब हुरियारे लोक गीत जुग-जुग जीयो, नाचन हारी गाकर उत्साहित करते हैं। गांव के छगन लाल शर्मा ने बताया कि 1845 में गांव के प्यारेलाल बाबा ने चरकुला नृत्य को नया रूप दिया। उन्होंने लकड़ी का घेरा, लोह की थाल व लोहे की पत्ती और मिट्टी के 108 दीपक रख 5 मंजिला चरकुला बनाया था। वर्ष 1930 से 1980 तक यह नृत्य लक्ष्मी देवी और अशर्फी देवी ने किया। पहले इसका वजन करीब 60 किलो होता था, अब यह करीब 40 किलो वजन होता है।
चरकुला के दीपों की ज्योति ने जैसे ही मुखराई गांव की सीमा लांघी, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। गांव के मदन लाल शर्मा और छगन लाल शर्मा चरकुला नृत्य के लिए लक्ष्मी देवी के साथ पहली बार मारीशस गए। इसके बाद तो नृत्य की मांग बढती गई। चरकुला की टीम जापान, इंडोनेशिया, रूस, चीन, सिगापुर, आस्ट्रेलिया तक इस अद्भुत कला की चमक बिखेर कर आई। चरकुला नृत्य के कारण ग्रामीणों को विदेश की सैर करने के साथ रोजगार मिल गया।
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