मुरादाबाद : पंचायत सहायकों का नौकरी से मोह भंग

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मुरादाबाद/अमृत विचार। कम मानदेय और काम के दबाव के चलते पंचायत सहायकों का तीन महीने में ही नौकरी से मोहभंग हो गया है। अब तक आठ पंचायत सहायकों ने अपने पद इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफों से पंचायतीराज विभाग के अधिकारी परेशान हैं। पिछले वर्ष शासन ने ग्रामीण योजनाओं संबंधी समस्याओं के निस्तारण व लोगों …

मुरादाबाद/अमृत विचार। कम मानदेय और काम के दबाव के चलते पंचायत सहायकों का तीन महीने में ही नौकरी से मोहभंग हो गया है। अब तक आठ पंचायत सहायकों ने अपने पद इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफों से पंचायतीराज विभाग के अधिकारी परेशान हैं।

पिछले वर्ष शासन ने ग्रामीण योजनाओं संबंधी समस्याओं के निस्तारण व लोगों को कार्यालयों के चक्कर काटने से राहत देने के उद्देश्य से पंचायत घरों में मिनी सचिवालय स्थापित किया गया था। इसके लिए जिले की 643 पंचायत घरों के एक कमरे को तैयार कराया गया। यहां पर जमीन, जोत, खतौनी, पेंशन समेत सभी योजनाओं की जानकारी देने के साथ समस्याओं का निस्तारण किए जाने की बात कही गई। मिनी सचिवालयों का संचालन करने के लिए पंचायत सहायक पद पर इंटर पास 643 युवाओं का चयन किया गया था। अक्टूबर में इन्हें छह हजार प्रतिमाह पर अनुबंधित किया गया था। कई पंचायतों ने नवंबर से उनसे काम लेना शुरू कर दिया।

बीएड, एमएड योग्यता वाले युवाओं ने किया था आवेदन
पंचायत सहायक की छह हजार रुपये मानदेय वाली नौकरी के लिए एमबीए, एमसीए, इंजीनियरिंग, स्नातक, परास्नातक डिग्रीधारी युवाओं ने आवेदन किए थे। नौकरी की चाहत में बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश भी लगवाई थी। जब जमीनी हकीकत सामने आई तो कइयों का मोहभंग हो रहा है।

केस 1- बिलारी देहात ग्राम पंचायत की मुकेश कुमार का पंचायत सहायक के पद पर अक्तूबर में चयन हुआ था। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण लेकर योजनाओं की जानकारी ली। नवंबर में अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। लेकिन मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

केस 2- नगलिया जट ग्राम पंचायत के रीतु चौधरी का चयन सितंबर में हुआ था। उन्हें पंचायत घर के संचालन का काम सौंपा गया। लेकिन संसाधन न होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इसकी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

डीपीआरओ अलोक प्रियदर्शी ने बताया चयनित 643 में से आठ पंचायत सहायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कारण मानदेय बताया जा रहा है। ऐसे में रिक्त पदों को मतगणना के बाद फिर भरने की कवायद शुरू होगी।

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