मुरादाबाद : जुआ और सट्टे से बनायी 10 करोड़ की संपत्ति, बुकी अजीम के खिलाफ दर्ज हैं 25 मुकदमे

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मुरादाबाद/अमृत विचार। कुख्यात सट्टा माफिया अजीम ने 20 साल में ही करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। कोतवाली सर्किल पुलिस के हत्थे चढ़ा यह सटोरिया कभी सट्टा किंग इस्लाम के लिए काम करता था। इस्लाम की मौत के बाद वह खुद इस धंधे का मुख्तार बन गया। वर्चस्व में बाधा …

मुरादाबाद/अमृत विचार। कुख्यात सट्टा माफिया अजीम ने 20 साल में ही करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। कोतवाली सर्किल पुलिस के हत्थे चढ़ा यह सटोरिया कभी सट्टा किंग इस्लाम के लिए काम करता था। इस्लाम की मौत के बाद वह खुद इस धंधे का मुख्तार बन गया। वर्चस्व में बाधा बन रहे बिट्टू को इसी ने साबिर कालिया के साथ मिलकर मरवा दिया था। तब से इसका सट़्टेबाजी में उसका एकछत्र राज्य था। इसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पंटरों और अन्य साथियों को चिन्हित कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

इस सटोरिए की गिरफ्तारी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार ने पुलिस लाइन में पत्रकार वार्ता की। इसमें बताया शार्टकट से अमीर होने के चक्कर में लोग आसानी से सट्टे के जाल में फंस जाते हैं। कई बार सट्टे में सबकुछ गंवा कर लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में सट्टे का नेटवर्क तोड़ने के लिए पिछले साल दिसंबर में ही अभियान शुरू किया गया था। इसी अभियान के तहत बुकी और पंटरों की लिस्ट तैयार की गई है। इसमें सटोरिया अजीम का नाम सबसे ऊपर है। वह कटघर थाने से वांछित था।

एसपी सिटी आलोक भदौरिया और सीओ कोतवाली आलोक कुमार अग्रहरि के नेतृत्व में गठित टीम ने इस बदमाश को उत्तराखंड के रुड़की में पीरान कलियर शरीफ दरगाह के पास से धर दबोचा है। इस टीम में एसएचओ कोतवाली, मुगलपुरा और नागफनी की टीम शामिल रही। आरोपी की धरपकड़ में पुलिस के साथ ही एसओजी और सर्विलांस टीम की भी अहम भूमिका रही है।

कई जिलों में फैला है नेटवर्क
पुलिस की पूछताछ में अजीम ने बताया कि उसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में फैला हुआ है। मुरादाबाद जिले में ही उसके करीब 50 पंटर काम कर रहे हैं। इस धंधे में पूरा पैसा सट्टा किंग वेबसाइट के जरिए लगाता है। गली-मोहल्लों में तैनात पंटर सट्टे की पर्चियां तैयार करके अजीम को देते थे। इसके बदले में लोकल एजेंट को दस फीसदी कमिशन और तीन प्रतिशत खर्च मिलता था। उसने बताया कि अकबर, आलम, इरशाद और उबैद इस धंधे में 20 से 25 प्रतिशत के सहयोगी हैं।

हर महीने दो से तीन लाख रुपये है कमाई
सट‌्टा किंग अजीम ने पुलिस को बताया कि इस धंधे में उसे दो से तीन लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से कमाई होती है। हालांकि एसएसपी का मानना है कि यह कमाई बहुत कम है। अजीम ने इस बारे में उन्हें सही जानकारी नहीं दी है। इस कमाई से अजीम आलीशान मकान में लग्जरी जिंदगी जीता था। एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया ने बताया कि अजीम बेहद लग्जरी जिंदगी जीने का शौकीन है। सदर कोतवाली क्षेत्र की नई बस्ती में उसका चार मंजिला मकान है। यह मकान सभी आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस है। इसके अलावा नई बस्ती में ही उसके दो-दो मंजिला दो मकान और भी हैं। इन्हीं तीनों मकानों की कीमत दस करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा उसकी और संपत्ति के बारे में भी जानकारी की जा रही है।

सट्टा किंग नाम की वेबसाइट से चलता था खेल
सट‌‌‌्टे का खेल दिल्ली की एक कंपनी कराती थी। इसके लिए सट्टा किंग नाम से वेबसाइट है। धंधे में आधे-आधे की पार्टनरशिप सट्टा किंग कंपनी के साथ शेयर किया जाता है। लेनदेन के लिए छोटू नामक व्यक्ति आता था। पहचाने के लिए वह आपस में कोड का इस्तेमाल करते थे। कई बार दस रुपये के नोट का आधा-आधा हिस्सा भी प्रयोग किया जाता है। सट्टे की खाईबाड़ी में जमाल उर्फ मोटा उसका पार्टनर है।

पत्नी व बच्चों के नाम है सारी संपत्ति
सीओ कोतवाली आलोक अग्रहरि ने बताया कि अजीम अनपट है, लेकिन दिमाग से बेहद शातिर है। इसने पुलिस से बचने के लिए अपनी सारी संपत्ति पत्नी, बच्चों और कुछ अन्य रिश्तेदारों के नाम करा रखी है। इसके खुद के नाम से कुछ भी नहीं है।

हत्या और कातिलाना हमले समेत लंबी है हिस्ट्रीशीट
इंस्पेक्टर नागफनी जयप्रकाश ने बताया कि अजीम के खिलाफ हत्या और जानलेवा हमले समेत जनपद के विभिन्न थानों में 25 मुकदमे दर्ज हैं। अजीम को कोतवाली पुलिस ने 1988 में जानलेवा हमले के मामले में जेल भेजा था। कोतवाली से ही उसके खिलाफ 1991 में गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। वर्ष 2007 में अजीम ने अपने साथी साबिर कालिया के साथ मिलकर इलाके के वचर्स्व को लेकर सट्टा किंग बिट्टू की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने पीछे पलटकर नहीं देखा।

व्हाट‌्सएप पर चलता है धंधा
सटोरियों का पूरा धंधा व्हाट्सएप पर चलता है। इसके लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। पांच रुपये प्रतिदिन के हिसाब से सपोटर रखे जाते हैं। धंधे से जुड़ा कोई भी व्यक्ति एक-दूसरे को अपना असली नाम तक भी नहीं बताता है। फोन और सिम एक सप्ताह में बदल लिए जाते हैं। इसके बाद नया कोड जारी किया जाता है। इस धंधे का संचालन दिल्ली से किया जाता है।

सटोरिया अजीम की गिरफ्तारी के साथ ही अन्य सट्टा माफिया भी पुलिस के रडार पर हैं। सभी की सूची तैयार कर ली गई है। जल्द ही जुए और सट्टे से जुड़े अपराधियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाएगा। -बबलू कुमार, एसएसपी

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