लखनऊ: राजधानी में दिनदहाड़े हुई नृशंस हत्याओं को भूली पुलिस, अब तक नहीं हो सका घटनाओं का खुलासा

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लखनऊ। विधानसभा चुनाव-2022 को लेकर प्रदेश में पुलिस पिछले रॉबिनहुड रोल में है। सघन छापेमारी करते हुए पुलिस अपराधियों को बिलों से खोद-खोदकर बाहर निकाल रही है और सलाखों के पीछे भेज रही है, पर लखनऊ के कुछ बहुचर्चित हत्याकांडों को तो पुलिस जैसे भूल ही गई है। हफ्तों बीतने के बाद पुलिस गत दिनों …

लखनऊ। विधानसभा चुनाव-2022 को लेकर प्रदेश में पुलिस पिछले रॉबिनहुड रोल में है। सघन छापेमारी करते हुए पुलिस अपराधियों को बिलों से खोद-खोदकर बाहर निकाल रही है और सलाखों के पीछे भेज रही है, पर लखनऊ के कुछ बहुचर्चित हत्याकांडों को तो पुलिस जैसे भूल ही गई है। हफ्तों बीतने के बाद पुलिस गत दिनों दिनदहाड़े हुए दो हत्याकांडों मामलों का अबतक खुलासा नहीं कर सकी है। इससे पुलिस की कार्यदक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

‘मिस्टर इंडिया’ जैसे गायब हो गए महेंद्र जायसवाल के हत्यारे

कृष्णानगर थाना क्षेत्र में गत 8 दिसंबर को पूर्व बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के पूर्व ड्राइवर सह कारोबारी महेंद्र जायसवाल की दिनदहाड़े बीच सड़क पर बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए नृशंस हत्या कर दी थी। हत्यारों के स्केच बनवाए गए, कई जगहों पर टीमें भेजी गईं, पर घटना को लेकर 81 दिन बीतने के बाद भ् पुलिस को हत्यारों का कोई सुराग हाथ नहीं लग सका है।

सीसीटीवी फुटेज के बाद भी सेवानिवृत्त बैंक कर्मी का सिरफिरा हत्यारा पहुंच से दूर

मड़ियांव थानांतर्गत एसबीआई कॉलोनी में गत 17 फरवरी को शाम करीब चार बजे अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर सेवानिवृत्त बैंक कर्मी ललित मोहन पांडेय (74) की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी। खुद की पहचान छिपाने के लिए सिरफिरे हत्यारे ने चाकुओं से ललित की दोनों आंखें फोड़ दी और कलाई की नसें भी काट दीं। पुलिस को घर के बाहर तीन संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज भी बरामद हुआ। पर घटना के 13 दिन बीतने के बाद अभी तक पुलिस अपराधियों की पहचान तक नहीं कर सकी है।

एसबीआई कॉलोनी के मामले में पुलिस लगातार लगी हुई है। बरामद हुआ सीसीटीवी फुटेज धुंधला है, जिसे क्लीयर करने के लिए एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। जल्द ही हत्यारों की गिरफ्तारी होगी।

-डॉ एस चनप्पा, डीसीपी, लखनऊ उत्तरी

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