मुरादाबाद में निमोनिया ने 15 पशुओं को बनाया शिकार, सीवीओ ने बनाई टीम

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मुरादाबाद/अमृत विचार। मौसम बदलते ही पशुओं में निमोनिया फैल रहा है। जिससे अब तक 15 पशुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में मौत का आंकड़ा बढ़ता देख पशु चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्था को पत्र लिखकर पशुओं की जांच कराने की अपील की है। स्थानीय …

मुरादाबाद/अमृत विचार। मौसम बदलते ही पशुओं में निमोनिया फैल रहा है। जिससे अब तक 15 पशुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में मौत का आंकड़ा बढ़ता देख पशु चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्था को पत्र लिखकर पशुओं की जांच कराने की अपील की है। स्थानीय पशु चिकित्साकों का दावा है कि खुरपका-मुंहपका वायरस नए रूप में आया है इसमें पैर-मुंह के साथ पशुओं को निमोनिया भी हो रहा है जिससे उनकी मौत हो रही है।

दिक्कत

  • भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान को लिखा जांच के लिए पत्र
    पशुधन प्रसार अधिकारी को तीन शिफ्टों में कार्य करने के निर्देश

सर्दियों में पशु खुरपका-मुंहपका की चपेट में आ जाते है। खुरपका-मुंहपका रोग कीड़े से होता है, जिसे आंखें नहीं देख पाती हैं। इसे विषाणु कहते हैं। यह रोग किसी भी उम्र की गाय व भैंस में किसी मौसम में हो सकता है। इसके चपेट में आने से पशु सूख जाता है। उसकी कार्य व उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। टीकाकरण से ही रोग की रोकथाम की जा सकती है। वहीं इस बार जांच में खुरपका-मुंहपका रोग का नया रूप देखने को मिला है। इसमें पशुओं को निमोनिया भी हो रहा है। ऐसे में पशु पालकों को पशुओं की देख-रेख करने के अपील की कई है।

बनाई छह सदस्यीय टीम : अगवानपुर में वायरस की चपेट में आने से अब तक आठ पशुओं की मृत्यु हो गई है। ऐसे में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा छह पशु चिकित्साधिकारियों की टीम का गठन किया है। जोकि पशु चिकित्सालय अगवानपुर के अन्तर्गत पशुओं में फैली बीमारी की रोकथाम एवं उपचार के लिए निरन्तर दिन रात काम करने के साथ ही पशुधन प्रसार अधिकारी तीन शिफ्टों में कार्य करेंगे।

झोलाछाप से इलाज कराना भी कारण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी प्रेम सिंह ने बताया कि पशु की मौत के बढ़ते आंकड़ों का एक कारण ये भी है कि ग्रामीण झोलाछाप से पशुओं का इलाज कराते हैं। ऐसे में जानकारी के अभाव में झोलाछाप बीमारी का आंकलन किए बिना कोई भी दवाई दे देते हैं। जिसके कारण पशु की मौत हो जाती है।

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