रामपुर: कमर्शियल कारों के निजी वाहन के रूप में कर दिए पंजीकरण
रामपुर, अमृत विचार। उप संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में जमकर खेल हो रहा है। बाबू और दलालों की सांठगांठ से ऐसी कमर्शियल कारों का पंजीकरण भी टैक्स चोरी करने के उद्देश्य से निजी वाहन के रूप में कर दिया गया है, जोकि कंपनी ने केवल व्यावसायिक उपयोग यानी टैक्सी में चलाने के …
रामपुर, अमृत विचार। उप संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में जमकर खेल हो रहा है। बाबू और दलालों की सांठगांठ से ऐसी कमर्शियल कारों का पंजीकरण भी टैक्स चोरी करने के उद्देश्य से निजी वाहन के रूप में कर दिया गया है, जोकि कंपनी ने केवल व्यावसायिक उपयोग यानी टैक्सी में चलाने के लिए ही बनाई गई हैं।
बाहरी जिलों से भी खरीदकर लाई गई कमर्शियल कारों का पंजीकरण निजी वाहन के तौर पर करने का मामला सामने आया है। हाल ही में स्थानांतरित होकर आए एआरटीओ ने इस तरह का मामला सामने आने पर ऐसी कारों के पंजीकरण पर रोक लगा दी है, जबकि यहां से ऐसी 25 कारों का निजी वाहन के रूप में रजिस्ट्रेशन होना पाया गया है। इससे परिवहन कार्यालय के दलालों में खलबली मची हुई है।
बता दें कि मारुति सुजुकी की टूर एस सीएनजी के नाम से कार कुछ माह पहले बाजार में आई थी। जिसका उपयोग कंपनी ने केवल कमर्शियल के रूप में टैक्सी के रूप में उपयोग के लिए किया जाता है। लेकिन मारुति के शो रूमों में काम करने वाले कर्मचारियों और एआरटीओ दफ्तर के दलालों ने इसमें में भी हेरफेर कर दी है। परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों से मिलकर इन वाहनों को प्राइवेट नंबरों पर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला मिलक से जुड़ा है यहां के रहने वाले गौरव शर्मा ने बीते माह इसी वैरियंट की एक कार मारुति सुज़ुकी एजेंसी बरेली से खरीदी थी।
जिसके रजिस्ट्रेशन को फाइल लेकर वह एआरटीओ कार्यालय रामपुर में गए थे। वहां पर रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल जमा कर दी थी लेकिन एक माह बीतने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर उन्होंने कारण पूछा तब एआरटीओ ने बताया कि इस वाहन का कमर्शियल में ही पंजीकृत के लिए ही अनुमोदन है। जिसे प्राइवेट में दर्ज नहीं की जाएगी, जबकि वहीं ऐसे ही कई वाहनों का पंजीयन पटल पर कई वर्ष से जमे बाबुओं ने साठगांठ करके कई ऐसी गाड़ियां प्राइवेट में दर्ज कर चुके हैं। पता चला है कि ऐसी 25 कारों के पंजीकरण रामपुर में होना बताए गए हैं। एआरटीओ ने नई कारों पर तो रोक लगा दी है, लेकिन पहले से पंजीकृत हो चुकी कारों के रजिस्ट्रेशन पर कोई फैसला नहीं किया है। इसको लेकर कार्यालय में खलबली मची हुई है।
कंपनी के कर्मचारी और दलाल मिलकर लगा रहे चूना
इस वाहन का रजिस्ट्रेशन प्राईवेट में नहीं होना है। उसके बाद भी तत्कालीन एआरटीओ बाबूओं और कंपनी के कर्मचारियों से साठगांठ करके कई कारों को नियम ताक पर रखकर रजिस्ट्रेशन कराए गए। टूर कार का सर्कुलर टैक्सी में पास होने का है तब ऐसे में ये वाहन प्राइवेट में पास कैसे कर दिए गए। इसमें तत्कालीन एआरटीओ के कर्मचारियों तथा मारुति सुज़ुकी कार के डीलर की मिलीभगत प्रतीत हो रही है।
वाहन सेल करते समय ग्राहकों को किया जाता है गुमराह
नियमों की माने तो डिजायर टूर वाहन प्राइवेट में पास नहीं होता है लेकिन यह बात ग्राहकों से छुपाकर वाहन बेच देते हैं वहीं डीलर उसका रोड टैक्स तथा रजिस्ट्रेशन फीस कमर्शियल से प्राइवेट में जमा करने में मनमानी कर रहे हैं, यही डीलर एआरटीओ से साठगांठ कर फाइल रजिस्ट्रेशन के लिए कार्यालय में जमा कर देते हैं जिसे नियमानुसार रोकने के बजाय नियमों की धज्जियां उड़ाकर प्राइवेट में पास कर दी जाती है।
कमर्शियल टैक्स और परमिट फीस का किया गया गबन
टैक्सी कार का टैक्स तिमाही करीब चार हजार की दर से जमा किया जाता है, वहीं परमिट अनुज्ञप्ति भी टैक्सी कार पर लागू होती है, जिसकी साल भर की फीस करीब दस से बारह हजार होती है। ऐसे में इन वाहनों को प्राइवेट में दर्ज करने से कमर्शियल टैक्स तथा परमिट फीस का सरकार को भारी नुकसान हो रहा है।
जो वाहन केवल टैक्सी में ही पास होने के लिए बना है, उसका प्राइवेट में रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते, ऐसी वाहन को पहले कमर्शियल में दर्ज किया जाएगा। जिस पर तिमाही रोड टैक्स और परमिट लागू होता है। यदि आवेदक फिर उसे प्राइवेट में कराना चाहता है तो पंजीयन तिथि के एक साल बाद परमिट कैंसिल कराकर प्राइवेट का वन टाइम टैक्स जमा कर प्राइवेट करा सकता है। -राजू श्रीवास्तव,एआरटीओ,रामपुर
हमारे यहां से जो भी कारें बिकी हैं उनका नियमानुसार ही पंजीकरण कराया गया है। हो सकता है कि कहीं और शो रूम से गाड़ी लाकर प्राइवेट में पंजीकरण करा लिया गया हो, वैसे कंप्यूटराइज्ड सिस्टम में ऐसी गड़बड़ी होना मुश्किल है। -अमित गोयल, डिस्ट्रीब्यूटर आकांक्षा मारुति सुजूकी शो-रूम रामपुर
