उन्नाव: यासमीन ने यूक्रेन में देखा मौत का मंजर, कहा- गिरती देखीं लाशें, कई रातें बिताईं भूखे-प्यासे
उन्नाव। यूक्रेन से भारत लौटी उन्नाव जिले के अखलाख नगर की छात्रा ने एक सप्ताह तक वहां जो मंजर देखा उसकी पीड़ा अभी भी उनके चेहरे पर देखने को मिली। शुक्रवार रात सकुशल वह अपने घर पहुंच गई। शुक्लागंज की जाजमऊ चौकी के निकट अखलाख नगर के रहने वाले डॉ. नसीम अहमद की बड़ी पुत्री …
उन्नाव। यूक्रेन से भारत लौटी उन्नाव जिले के अखलाख नगर की छात्रा ने एक सप्ताह तक वहां जो मंजर देखा उसकी पीड़ा अभी भी उनके चेहरे पर देखने को मिली। शुक्रवार रात सकुशल वह अपने घर पहुंच गई।
शुक्लागंज की जाजमऊ चौकी के निकट अखलाख नगर के रहने वाले डॉ. नसीम अहमद की बड़ी पुत्री यासमीन फातिमा यूक्रेन के बीएन कराजिन खरकीव नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। इस वर्ष वह तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। यासमीन ने बताया कि वह खरकीव सिटी ईस्टर्न बाडर पर थी।
वहाँ पर 24 फरवरी से लगातार गोलियां चल रही थी और बमबारी हो रही थी। भारत के बहुत से छात्र वहाँ पर थे। हम लोग अपनी जान बचाने के लिए कई दिनों तक मेट्रो स्टेशन के अंदर बंकरों में रहे। बड़ा ही भयावह मंजर था। हमने लोगों को मरते हुए देखा है। डर के कारण कई राते हमने भूखे प्यासे वहीं बिताई।
हम लोगों को खुद को बचा पाना भी मुश्किल लग रहा था तब हम सबने अपनी जान बचाने के लिए गोली बारी के बीच हो वहाँ से निकलना उचित समझा। हम ईस्ट से वेस्ट तक ट्रेन से गये और हंगरी बाडर तक पहुंचे। जहाँ से हमें भारतीय दूतावास के लोगों ने घर तक पहुंचाने में मदत की।
भारत सरकार से मिली निराशा
हमें भारत सरकार से बहुत उम्मीद थी कि सरकार हम छात्रों को वहाँ से सुरक्षित निकालने में मदत करेगी। परन्तु सरकार ने हमारी कोई मदत नहीं की इस बात की अधिक पीड़ा भी हैं। सरकार ने महज खानापूर्ति करते हुए बाडर से हम छात्रों के लिए फ्लाइट की व्यवस्था की जो कि यूक्रेन से निकलने के बाद हम छात्र स्वयं कर सकते थे। हमें सरकार की मदत की असल जरूरत खरकीव से हंगरी बाडर तक पहुचने में थी। जहाँ किसी ने हमारी मदत नहीं की।
माता पिता के आशीर्वाद के कारण हम जिंदा वापस आये
हमनें तो बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। क्योंकि हमारे चारों ओर सिर्फ मौत का मंजर था। खरकीव से यूक्रेन के सैनिक हमें आने नहीं दे रहे थे। कई बार हमें ट्रेन से नीचे फेका गया। हमे मारा पीटा गया। हमारे कई सहपाठियों को चोटें आई हैं। एक का तो हाथ भी टूट गया। पर शायद मेरे माता पिता का आशीर्वाद मेरे साथ था जो आज हम अपने परिवार के साथ हैं।
सरकार यूक्रेन से लौटे छात्रों को भारत मे दिलाये दाखिला
यासमीन के पिता डॉ नसीम अहमद ने सरकार पर नाराजगी दिखाते हुए कहा कि बेटी सकुशल घर वापस आ गई इससे वह बहुत खुश हैं। उसके भविष्य को लेकर चिंता भी है कि अब आगे की पढ़ाई का क्या होगा। उन्होंने सरकार से अपील की वतन वापस लौटे छात्रों को देश में दाखिला दिलाया जाए।
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